⛔ गाजे-बाजे के साथ निकली शोभायात्रा, बेलतोरी की परंपरा हुई पूरी
मुरलीगंज में सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में सप्तमी पूजा पर जुटे श्रद्धालु, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बेल वृक्ष की हुई पूजा-अर्चना
मुरलीगंज। शारदीय नवरात्र की सप्तमी पूजा के अवसर पर शनिवार को मुरलीगंज के ऐतिहासिक सार्वजनिक दुर्गा मंदिर में पारंपरिक बेलतोरी की रस्म पूरी की गई। इस दौरान श्रद्धा और आस्था का माहौल बना रहा। गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ निकली शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। मां दुर्गा के जयकारों से नगर का वातावरण भक्तिमय हो गया।
दुर्गा पूजा समिति की ओर से मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं की शोभायात्रा सार्वजनिक दुर्गा मंदिर से निकलकर नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए काशीपुर पहुंची। यहां श्रद्धालु पालकी के साथ बेल वृक्ष के समीप एकत्रित हुए। पंडित ज्योतिष झा के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बेल वृक्ष की जड़ में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
जुड़वा बेल तोड़ने की है परंपरा
पारंपरिक विधि के अनुसार, जुड़वा बेल प्राप्त करने के लिए एक व्यक्ति को बेल वृक्ष पर चढ़ाया गया। इस दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के जयकारे लगाते रहे। स्थानीय मान्यता के अनुसार, बेलतोरी की रस्म से प्राप्त जुड़वा बेल को मां दुर्गा को अर्पित किया जाता है। इसे शारदीय नवरात्र की पूजा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मध्यरात्रि में मां दुर्गा की प्रतिमा के समक्ष विशेष चढ़ावा अर्पित करने और बलि की परंपरा भी प्राचीन काल से चली आ रही है। बेलतोरी की रस्म पूरी होने के साथ ही श्रद्धालुओं में पूजा को लेकर उत्साह और बढ़ गया। इस अवसर पर लोगों ने मां दुर्गा से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। पूरे नगर में दिनभर भक्तिमय माहौल बना रहा।
📹 Murari Singh मधेपुरा टाइम्स Madhepura Times