अहमदाबाद से पंचकूला और फिर कोलकाता तक कोडिन सिरप की तस्करी के अंतरराज्यीय नेटवर्क पर पंचकूला पुलिस का शिकंजा, 1000 शीशियां बरामद, वजन करीब 100 किलो
4 लाख में खरीदकर 12 लाख में बेचने की थी प्लानिंग, फर्जी लेबल और फर्जी बिल से खुली पोल, तीनों आरोपी पुलिस रिमांड पर
पंचकूला/ 23 अक्टूबर:- नशीली दवाइयों की अवैध तस्करी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए इनके कारोबार में शामिल आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पंचकूला पुलिस की क्राइम ब्रांच-3 ने एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने अब मामले में उत्तर प्रदेश के कानपुर क्षेत्र के रहने वाले तीसरे आरोपी गणेश सैणी को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पर अन्य साथियों के साथ मिलकर कोडीन युक्त कफ सिरप के लेबल बदलने, फर्जी बिल तैयार करने और नशीली दवाइयों को अवैध रूप से बेचने की साजिश में शामिल होने का आरोप है। करीब 4 लाख रुपये कीमत की दवाइयों को लगभग 12 लाख रुपये में बेचने की तैयारी थी। मामले में इससे पहले दो अन्य आरोपियों राकेश कुमार और आशीष कुमार को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और इसके तार दूसरे राज्यों तक फैले होने की संभावनाओं की जांच कर रही है।
एसीपी क्राइम अमन कुमार के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 को सेक्टर-25 स्थित कोरियर कंपनी के संचालक ने पुलिस को सूचना दी कि उनके कार्यालय में कोरियर के माध्यम से आई 10 गत्ते की पेटियों में नशीली दवाइयां होने का संदेह है। सूचना मिलने पर क्राइम ब्रांच-3 के इंचार्ज एसआई राजेश कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। ड्रग कंट्रोल अधिकारी और आबकारी विभाग की अधिकारी की मौजूदगी में पेटियों की जांच की गई। जांच के दौरान 10 पेटियों से कोडीन फॉस्फेट युक्त सिरप की कुल 1,000 शीशियां बरामद हुईं। ड्रग कंट्रोल अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार, बरामद सिरप में कोडीन फॉस्फेट होने के कारण यह एनडीपीएस एक्ट के दायरे में आता है और सिरप का अनुमानित कुल वजन करीब 100 किलोग्राम था। पुलिस ने दवाइयों को नियमानुसार कब्जे में लेकर थाना चंडीमंदिर में एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक आईपीएस अमरिंदर सिंह के अनुसार जांच में सामने आया कि दवाइयों की खेप को कोरियर के माध्यम से कोलकाता भेजा गया था, लेकिन वहां संबंधित फर्म ने यह कहते हुए खेप लेने से इनकार कर दिया कि न तो यह सामान उनका है और न ही इससे संबंधित बिल उनकी फर्म द्वारा जारी किया गया है। इसके बाद दवाइयों की पेटियां वापस पंचकूला पहुंच गईं। आरोपियों ने फर्जी बिल और बदले हुए लेबल के माध्यम से नशीली दवाइयों को वैध दवाइयों के रूप में दिखाकर बाजार में बेचने की योजना बनाई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दवाइयां अहमदाबाद से मंगवाई गई थीं, पंचकूला में उनके लेबल बदलने और फिर कोलकाता में ऊंचे दाम पर बेचने की तैयारी थी। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है।
पुलिस जांच के दौरान 16 अक्टूबर को राकेश कुमार और आशीष कुमार को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद दोनों आरोपियों की पहचान और पूछताछ के आधार पर 21 अक्टूबर को गणेश सैणी को गिरफ्तार किया गया। 22 अक्टूबर को आरोपी के बयान के आधार पर पुलिस ने मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच तेज कर दी। आरोपी के साथियों की तलाश की जा रही है।
पुलिस कमिश्नर आईपीएस पंकज नैन के अनुसार आरोपी और उसके साथी कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम करते हुए नशीली दवाइयों की खेप को फर्जी बिलों और बदले हुए लेबल के जरिए बेचने में शामिल थे। बरामदगी वाणिज्यिक मात्रा में होने के कारण मामला गंभीर श्रेणी का है। तीनों आरोपियों से रिमांड के दौरान पूछताछ जारी है ताकि उससे गहन पूछताछ करके पूरे नेटवर्क, दवाइयों की खरीद-फरोख्त, फर्जी दस्तावेज तैयार करने में शामिल लोगों और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
Uklana, Hissar | Oct 23, 2026