20 अगस्त से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठेगी आरसीएफसी बचाओ संघर्ष समिति : गुरु शरण परमार
25 अगस्त को चक्का जाम और विशाल धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
जोगिंद्रनगर/उमेश कुमार।
क्षेत्रीय सह सुविधा केंद्र (आरसीएफसी) जोगिंद्रनगर को यहां से स्थानांतरित करने के प्रस्ताव के विरोध में आरसीएफसी बचाओ संघर्ष समिति ने आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया है। समिति के अध्यक्ष गुरु शरण परमार ने कहा कि यदि 20 अगस्त तक राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) द्वारा आरसीएफसी को जोगिंद्रनगर से स्थानांतरित करने के आदेश निरस्त नहीं किए गए, तो समिति 20 अगस्त से रामलीला मैदान स्थित ऋतु रंगमंच पर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू करेगी, जो 24 अगस्त तक जारी रहेगी।
गुरु शरण परमार ने कहा कि 13 अगस्त को समिति की ओर से आयोजित विशाल रैली के दौरान केंद्र और प्रदेश सरकार को ज्ञापन सौंपकर आरसीएफसी को जोगिंद्रनगर से स्थानांतरित करने के निर्णय को रद्द करने की मांग की गई थी। इसके बावजूद यदि सरकार की ओर से इस दिशा में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो समिति आंदोलन को और उग्र करने के लिए मजबूर होगी।
उन्होंने बताया कि समिति ने अनुराग ठाकुर, सांसद हमीरपुर के समक्ष मामले को रखने के लिए मेघना ठाकुर, राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड भारत सरकार की सचिव के समक्ष पक्ष रखने के लिए प्रदेश भाजपा प्रवक्ता पंकज जमवाल तथा विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को उठाने के लिए स्थानीय विधायक प्रकाश राणा को अधिकृत किया है।
गुरु शरण परमार ने चेतावनी दी कि यदि 20 से 24 अगस्त तक चलने वाली क्रमिक भूख हड़ताल के बावजूद आरसीएफसी स्थानांतरण का आदेश रद्द नहीं किया गया, तो 25 अगस्त को चक्का जाम और जोगिंद्रनगर शहर में विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड की होगी।
सात राज्यों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है आरसीएफसी
गुरु शरण परमार ने कहा कि आरसीएफसी एनआर-1 आयुष मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) का महत्वपूर्ण केंद्र है, जो उत्तर भारत के सात राज्यों—उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश—के लिए औषधीय एवं सुगंधित पौधों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि यह केंद्र सितंबर 2017 में जोगिंद्रनगर स्थित भारतीय चिकित्सा पद्धति अनुसंधान संस्थान (आरआईआईएसएम) में स्थापित किया गया था। जोगिंद्रनगर में करीब 24 एकड़ भूमि और पहले से उपलब्ध आधारभूत ढांचे के चलते यह केंद्र औषधीय पौधों से संबंधित अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पादन और जन-जागरूकता गतिविधियों के लिए उपयुक्त है।
किसानों और युवाओं को होगा नुकसान
गुरु शरण परमार ने कहा कि यदि आरसीएफसी को जोगिंद्रनगर से स्थानांतरित किया जाता है तो क्षेत्र के किसानों, विद्यार्थियों, स्थानीय युवाओं और अन्य हितधारकों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ से वंचित होना पड़ेगा। इसके अलावा केंद्र में कार्यरत करीब 12 कर्मचारियों और उनके परिवारों पर भी रोजगार तथा आजीविका को लेकर आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने मांग की कि किसानों के हित, औषधीय एवं सुगंधित पौधों के संरक्षण तथा आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आरसीएफसी की भूमिका को देखते हुए इसके स्थानांतरण के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए और आरसीएफसी एनआर-1 को जोगिंद्रनगर में ही यथावत बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
उन्होंने सुझाव दिया कि जोगिंद्रनगर में उपलब्ध भूमि और आधारभूत ढांचे का बेहतर उपयोग करते हुए आरसीएफसी एनआर-1 को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के अनुसंधान, प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, संरक्षण, मूल्य संवर्धन और विपणन के मजबूत क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
बैठक में समिति के संयोजक मंडल के सदस्य एवं प्रदेश भाजपा प्रवक्ता पंकज जमवाल, वरिष्ठ रोटेरियन अजय ठाकुर, व्यापार मंडल उपप्रधान विशाल शर्मा, महासचिव सतवीर शर्मा, पूर्व सैनिक लीग जोगिंद्रनगर से कर्नल रूप सिंह ठाकुर, मेजर ज्ञान चंद बरवाल, कैप्टन दलीप सिंह ठाकुर, सूबेदार मेजर लाभ सिंह धरवाल, समिति उपाध्यक्ष प्यार ठाकुर, ब्रिज गोपाल अवस्थी, महासचिव रमन बहल, संतोष ठाकुर, सचिव कालिदास सकलानी और कांशी राम वर्मा सहित जोगिंद्रनगर के अनेक लोग उपस्थित रहे।