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मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर में बना यह ऐतिहासिक स्काउट भवन आज बदहाली के आंसू रोने को मजबूर, कब जागेगा प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि? अक्सर बड़े मेलों, सावन मेला, सार्वजनिक आयोजनों, त्योहारों और महा-उत्सवों में जब व्यवस्था संभालनी होती है, तो धूप-बारिश की परवाह किए बिना खाकी वर्दी में मुस्तैद छोटे-छोटे भारत स्काउट और गाइड के बच्चे ही जनता की सेवा और सुविधा के लिए सबसे आगे नजर आते हैं। लेकिन सेवा और अनुशासन सिखाने वाले इन्हीं बच्चों का मुजफ्फरपुर स्थित 'स्काउट भवन' आज अपनी पहचान खो चुका है। मुजफ्फरपुर के विकास पुरुष और तत्कालीन विधायक रघुनाथ पाण्डेय ने नई पीढ़ी को संस्कार, सेवा भाव और अनुशासन से जोड़ने के लिए दूरदर्शी सोच के साथ अपने सौजन्य से इस भवन का निर्माण कराया था। 27 अक्टूबर 1991 को बतौर बिहार राज्य भारत स्काउट और गाइड अध्यक्ष, उन्होंने इसका उद्घाटन किया था। यह भवन कभी सेवा, प्रशिक्षण और सामाजिक गतिविधियों का गौरवशाली केंद्र हुआ करता था। गौरवशाली केंद्र से पार्किंग और नशे के अड्डे तक का सफर: * खेल का मैदान छिना: कभी स्थानीय बच्चों के खेलने-कूदने का जीवंत मैदान रहे इस परिसर पर धीरे-धीरे असामाजिक तत्वों की नजर पड़ी और इसे नशेड़ियों का अड्डा बना दिया गया। * तारों का घेरा और ताला: बदहाली और सुरक्षा कारणों से अंततः इसे कंटीले तारों से घेरकर ताला जड़ दिया गया। * अवैध पार्किंग का कब्जा: आज पूरा भवन जीर्ण-शीर्ण होकर खंडहर में तब्दील हो रहा है और इसके ऐतिहासिक मैदान का इस्तेमाल अज्ञात वाहनों की पार्किंग के लिए हो रहा है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बड़ा सवाल: जिस संस्था के बच्चे हर सरकारी और गैर-सरकारी आयोजन में प्रशासन का हाथ बंटाते हैं, आज उसी संस्था की धरोहर पर ताला लटका है। * क्या मुजफ्फरपुर के वर्तमान जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बनती कि रघुनाथ पाण्डेय की इस अमूल्य देन का जीर्णोद्धार कराएं? * आखिर कब इस ताले को खोलकर भवन का पुनरुद्धार होगा और इसे दोबारा बच्चों के प्रशिक्षण व खेलकूद के लिए सुरक्षित बनाया जाएगा? अगर समय रहते ऐतिहासिक स्काउट भवन को नहीं बचाया गया, तो यह अनमोल धरोहर इतिहास के पन्नों में ही दफन हो जाएगी। प्रशासन तुरंत संज्ञान ले और परिसर को अतिक्रमण मुक्त कर इसका जीर्णोद्धार कराए। - Musahri News