श्री लाडले लाल प्रभु को सुखपाल में विराजित कर मोती महल चौक में अद्भुत गोलोक की छटा में सिंह मंडप में सिंहासन पर प्रभु को गोप,गोपी,सखियां एवं गौ माता एवं गोवत्स के मध्य विराजित किया गया इस अवसर पर प्रभु के सम्मुख छोटे-छोटे गौ वत्स (बछड़े) ठाकुर जी के सम्मुख अपनी अठखेलियां कर प्रभु को रिझा रहे थे एवं प्रभु के सम्मुख असंख्य काठ के गौवंश गौ लोक का आनंद अनुभव करा रहे थे। इस अलौकिक मनोरथ में तिलकायत श्री एवं श्री विशाल बावा व श्री लाल बावा समस्त वल्लभ कुल सहित बिराज कर प्रभु के अलौकिक मनोरथ में प्रभु को खूब लाड लड़ाए व आरती उतारी।