पारंपरिक खेती से आधुनिक एवं विविधीकृत कृषि की ओर एक सफल कदम
कभी किसान मुख्य रूप से धान और गेहूँ की पारंपरिक खेती करते थे। लेकिन कृषि विभाग एवं आत्मा (ATMA) द्वारा आयोजित प्रशिक्षण, परिभ्रमण कार्यक्रमों में भाग लेने और वाराणसी में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद खेती के नए तौर-तरीकों की जानकारी मिली और कुछ नया करने की प्रेरणा मिली।
इसी प्रेरणा से किसान ने पारंपरिक खेती के साथ-साथ मक्का की खेती, लगभग 10 कट्ठा क्षेत्र में आलान पर सब्जियों की खेती तथा 1 बीघा क्षेत्र में जैविक तरीके से बैंगन की खेती शुरू की।
इसके साथ ही 250 अमरूद के पौधे, कागजी नींबू तथा प्रायोगिक तौर पर लगभग 2 कट्ठा क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती भी शुरू की गई।
खेती में इस विविधीकरण और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का सकारात्मक परिणाम सामने आया। इससे किसान की आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और आय लगभग दोगुनी हो गई।
यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि नई तकनीक, प्रशिक्षण, सही मार्गदर्शन और खेती में विविधीकरण किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
प्रशिक्षण से ज्ञान, ज्ञान से नवाचार और नवाचार से समृद्धि — यही आधुनिक कृषि की नई दिशा है।
कृषि विभाग एवं आत्मा द्वारा आयोजित प्रशिक्षण एवं परिभ्रमण कार्यक्रम किसान के आर्थिक एवं सामाजिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुए हैं।
किसान आगे बढ़ेगा, तभी कृषि समृद्ध होगी।
विविधीकृत खेती — समृद्ध किसान की ओर एक मजबूत कदम।
7 views | Saharsa, Bihar | Sep 30, 2026