काशी साहित्य वृंद *धर्मराज सिंह ठाकुर* को "साहित्य शिल्पी" सम्मान
इक दीया मैने रखी थी दहलीज पर और सूरज सवेरे खफा हो गया
देखते देखते क्या से क्या हो गया जो गुनहगार था देवता हो गया..
साहित्यकार लेखन के माध्यम से संस्कृति संरक्षण करते हैं..
साहित्यकारों के लिए राष्ट्रीय कवि चौपाल मंच स्वयं में प्रेरणा का मंच है,
राष्ट्रीय कवि चौपाल 592 वीं कड़ी विश्व शाकाहार दिवस एवं विश्व लेखक दिवस को समर्पित रही आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता में वंदे मातरम् मंच के संस्थापक अध्यक्ष विजय कोचर मुख्य अतिथि में काशी से पधारे युवा कवि धर्मराज सिंह ठाकुर विशिष्ट अतिथि में डॉ मोहम्मद फारूक चौहान, सरदार अली परिहार आदि मंच सुशोभित हूए कार्यक्रम शुभारम्भ करते हुए रामेश्वर साधक ने स्व बौद्धिक में कहा कि शाकाहार स्वयं में न केवल स्वस्थता, प्रसन्नता, सफलता, के हेतु सेतु हैं वरन् सत्कर्म शतायु प्रभो सान्निध्य का स्थायी कालजयी स्तंभ भी है कार्यक्रम अध्यक्ष विजय कोचर ने कहा कि साहित्यकार लेखन के माध्यम से संस्कृति संरक्षण करते हैं जो इतिहास परक है मुख्य अतिथि धर्मराज सिंह ठाकुर काव्य धारा में मन के अभिव्यक्ति इस तरह दी.. देखते देखते क्या से क्या हो गया जो गुनहगार था देवता हो गया..इक दीया मैने रखी थी दहलीज पर और सूरज सवेरे खफा हो गया
विशिष्ट अतिथि डॉ मोहम्मद फारूक चौहान ने बताया कि साहित्यकारों के लिए राष्ट्रीय कवि चौपाल मंच स्वयं में प्रेरणा का मंच है, सरदार अली परिहार पानी की तरह तरल सरल और सर्वकाल उपयोगी रहो.. कैलाश टाक : मैं पढ़ता हूं ज़माने को, मुझे कोई पढ़ नहीं सकता.. चढ़ा है रंग तेरी मुहब्बत का दूजा कोई रंग चढ़ नहीं सकता ... अरमान खान : तेरे आगे ज़िद करता है तेरा लाडला, दुनिया के गमों से हारा है, सोचकर रोना आ जाता है मां के बाद हमारा कौन सहारा .. युवा कवि ने पूरे मंच की वाह वाही लूंटी
*इसी बीच राष्ट्रीय कवि चौपाल समूह द्वारा साहित्य स्नेहिल धर्मराज सिंह ठाकुर का सम्मान प्रशस्ति पत्र, रत्न जड़ित मोतीयन माला श्री फल शाॅल एवं पुष्प मालाएं आदि से आत्मीय स्वागत किया गया*
रामेश्वर साधक : संभव नहीं बिना गलती किये, बुनियाद से कंगुरों को छुआ है। गलती हुई....मतलब काम तो बना हुआ है... विनिता शर्मा : किसी को भी बना देना अहिल्या आसान है, किस किस के आगे आएंगे राम .. ज्योति स्वामी : रास्तो दोरो होवै तो होवै पण पग कदै नहीं रुके, जिण रौ भरोसे ठाकुर जी माथै होवै सौ कदैइ नीं झुके.. राजस्थानी भाषा में अध्यात्म रचना सुनाकर सदन का मन मोह लिया
कृष्णा वर्मा : एक वक्त था जब हम सबका दर्द सुना करते थे, आज वक्त है हम सबका अवसाद सुना करते हैं.. शिव प्रकाश शर्मा : चंदा करै सूरज तेरा शीतल प्रकाश सबको अच्छा लगता है.. प्रो सईद अहमद साहित्य को जीना सर्व हित लिखना जीना मरना ही है.. पवन चड्ढ़ा : आधा है चंद्रमा रात आधी, रह न जाए तेरी मेरी मुलाकात आधी गीत गाकर सदन का मन मोह लिया
आज़ के कार्यक्रम में 15 प्रस्तुतियां हुई तथा कार्यक्रम में चंद्र शेखर सेवग, राधा किशन सोनी, राजू लखोटिया, सिराजुद्दीन भुट्टा, छोटू खां, घनश्याम सौलंकी, नासिर, नाथू, जरीन, काजल आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे कार्यक्रम संचालन चुटिले शायराने रसीले अंदाज में कैलाश टाक ने किया l