आशाग्राम ट्रस्ट त्याग,सेवा एवं समर्पण के 43 वर्ष
वंचित वर्ग की समावेशी कौशल प्रदर्शनी अनुकरणीय न्यायाधीश श्री अमूल मंडलोई
बड़वानी 13 जुलाई 2026/जिले का आशाग्राम ट्रस्ट 13 जुलाई 1983 को लिखी गई एक ऐसी सेवा की इबारत है जो अपनी स्थापना की नींव में ही समाज के सबसे संवेदनशील एवं उपेक्षित कुष्ठ रोगियों के प्रति मानवीयभाव को समाहित किए हुए हैं। आशाग्राम ट्रस्ट के 43 वे स्थापना दिवस के अवसर पर विशेष जनों के विभिन्न खेलों के आयोजन के साथ-साथ समावेशी कौशल प्रदर्शनी लगाई गई जिसका शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री महेंद्र कुमार जैन के मार्गदर्शन में न्यायाधीश एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री अमूल मंडलोई एवं जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री रॉबिन दयाल के द्वारा ट्रस्ट सचिव डॉ चक्रेश पहाड़िया एवं न्यासीगणों की उपस्थिति में किया गया। न्यायाधीश श्री मंडलोई ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए कहा स्वावलंबन का प्रतीक समावेशी कौशल प्रदर्शनी दिव्यांगजनों विशेष कर मनोरोगियों एवं कुष्ठ रोगियों के द्वारा तैयार की गई अनुपम कृति को एक प्लेटफार्म प्रदान करना है। इसे अखिल भारतीय स्तर की प्रदर्शनी में भेजने का प्रयास करेंगे। प्रदर्शनी में कुष्ठ रोगियों एवं मनोरोगियों के द्वारा तैयार किए गए हस्त निर्मित आसन एवं पेंटिंग के साथ-साथ डिस्पोजल वेस्ट से बनाए गए झूमर आकर्षण का केंद्र रहे ।श्रीमती जयति सिंह कलेक्टर एवं ट्रस्ट के अध्यक्ष के मार्गदर्शन में संचालित आशाग्राम ट्रस्ट एक और जहां निराश्रित मनोरोगियों को संबल प्रदान करते हुए बिछड़े हुए परिवार से मिला रहा है वही चिकित्सा सेवा प्रकल्प एवं स्वावलंबन गतिविधियों में भी निरंतर सेवारत है। ट्रस्ट के सचिव डॉ चक्रेश पहाड़िया ने बताया ट्रस्ट के 43 वे स्थापना दिवस के अवसर पर समावेशी खेल एवं कौशल प्रदर्शनी के द्वारा मनोरोगियों, कुष्ठ रोगियों, दिव्यांगजनों के साथ सामान्यजनों ने समरस समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस दौरान आशाग्राम ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष डॉ मदन सिंह सोलंकी, डॉ सुहास यादव, श्री के एस मकवाना, ट्रस्ट के श्री सचिन दुबे, श्री मणिराम नायडू, श्री मनीष पाटीदार, डॉ संजय राठौर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के श्री अर्जुन परमार ,श्री समाधान पाटील,श्रीमती साधना भावसार आशा इंस्टीट्यूट आफ नर्सिंग स्टाफ उपचारित मनोरोगी आदि उपस्थित रहे।
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