➡️ इंडो-जर्मन कार्यशाला खुरई का द्वितीय दिवस सम्पन्न, प्राकृतिक खेती फसल अवशेष प्रबंधन एवं जलवायु अनुकूल कृषि पर हुआ मंथन
दिनांक 16 से 18 जून तक खुरई में आयोजित इंडो-जर्मन कार्यशाला का द्वितीय दिवस सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ जर्मनी से आए GIZ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर मिस्टर हेन्स क्लेन द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. के.एन. अग्रवाल (ICAR-CIAE) ने पराली प्रबंधन एवं आधुनिक कृषि मशीनरी के उपयोग पर विस्तृत जानकारी दी। वहीं कमलेश मगरधे ने “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” योजना तथा कृषि यंत्रों के एक्सपोर्ट मॉडिफिकेशन के संबंध में जानकारी साझा की।
डॉ. जितेंद्र कुमार, कृषि वैज्ञानिक भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान भोपाल ने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने एवं संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। अनुविभागीय कृषि अधिकारी जय दत्त शर्मा ने उपसंचालक कृषि के मार्गदर्शन में जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने हेतु विकसित किए गए क्लस्टरों की जानकारी व विभागीय गतिविधियों पर प्रकाश डाला।विजय इंडस्ट्री से विजय जैन जी ने खुरई क्षेत्र के कृषि यंत्रीकरण की भूमिका पर चर्चा की ।
फसल अवशेष के प्रबंध सत्र में श्री कुलवीर सिंह बरार (टाटा ट्रस्ट) ने नरवाई प्रबंधन एवं फसल अवशेषों के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी दी ।डॉ. जितेंद्र कुमार (IISC), श्री राकेश गुप्ता (TNC), श्री कुलवीर सिंह बरार (टाटा ट्रस्ट) ने अपने विचार साझा किए।कृषि अभियांत्रिकी विभाग से अल्बर्ट कुजूर ने विभागीय योजनाओं के अनुदान व यंत्रों की उपयोगिता पर बारीकी से जानकारी दी ।डॉ. संतोष सहाने ने बायो रिसोर्स सेंटर के माध्यम से ईंधन एवं जैविक उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर जानकारी प्रदान की। TNC से रवि गुप्ता, दयोदय के सीईओ अक्षय जैन , डॉ मनीष जैन आदि भी अतिथि वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
*प्राकृतिक कृषि में कीट प्रबंधन*
कनाडा से पधारे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मिस्टर जुलियस मेलार्ड ने प्राकृतिक खेती में मित्र एवं शत्रु कीटों की पहचान तथा उनके प्रबंधन की महत्वपूर्ण जानकारी दी। कई देशों के अनुसंधान के आधार पर अति महत्वपूर्ण जानकारियों से किसानों को अवगत कराया।
कार्यशाला के फसल अवशेष प्रबंधन सत्र में कार्यक्रम में डॉ. के.एन. अग्रवाल (ICAR-CIAE, भोपाल) ने पराली एवं नरवाई प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों पर प्रकाश डाला। कमलेश मगरधे (जिला उद्योग केंद्र, सागर) ने बताया कि नरवाई प्रबंधन में उपयोग होने वाले कृषि यंत्रों में आवश्यक संशोधन (मॉडिफिकेशन) कर उन्हें अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है तथा इन यंत्रों के निर्माण और विपणन में भी व्यापक संभावनाएं हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक, ICAR-CIAE) ने कहा कि कृषि यंत्रीकरण तेजी से बढ़ रहा है और किसानों द्वारा आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, जिससे खेती अधिक लाभकारी एवं प्रभावी बन रही है।
विशेषज्ञों ने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इसके स्थान पर जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देकर किसानों की लागत कम की जा सकती है तथा मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देना आवश्यक है। कृषि अवशेषों को जलाने के बजाय उनके वैज्ञानिक प्रबंधन एवं उपयोग से किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है तथा प्रदूषण में भी कमी लाई जा सकती है।
कृषि विज्ञान केंद्र, सागर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. आशीष त्रिपाठी ने लाइट ट्रैप एवं फेरोमोन ट्रैप के माध्यम से कीट प्रबंधन की आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया।
*कृषि पारिस्थितिकी यंत्रीकरण*
अंतिम सत्र में कैमरून से पधारीं मिस मिलियन लाटा ने कृषि पारिस्थितिकी या यंत्रीकरण विषय पर प्रस्तुतिकरण दिया। कृषि पारिस्थितिकी यंत्रीकरण में
मिट्टी के स्वास्थ्य, जैव विविधता और जल संरक्षण को नुकसान पहुँचाए बिना उत्पादकता बढ़ाना और मानव श्रम को कम करने जैसे विषयों पर चर्चा की।
कार्यशाला के प्रत्येक सत्र में अतिथि विद्वानों ने प्रस्तुतिकरण दिया चर्चा की और इसके बाद उपस्थित किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने आधुनिक तकनीकों, प्राकृतिक खेती और फसल अवशेष प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। कार्यशाला में GIZ टीम सहित बड़ी संख्या में जिले के विभिन्न विकासखंड से आए प्राकृतिक खेती करने वाले किसान, कृषि विभाग का समस्त स्टाफ,कृषक उत्पादक समूह, प्रगतिशील कृषक, कृषि यंत्र निर्माता सम्मिलित हुए।
CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh #JansamparkMP #sagar
32 views | Sagar, Madhya Pradesh | Jun 17, 2026