🚨 बेल्जियम से #लखीमपुर तक का सफर… रास्ते में पुल बने बाधा, कहीं बनाना पड़ा वैकल्पिक रास्ता, तो कहीं हटाने पड़े फुट ओवरब्रिज के हिस्से! आखिरकार #खीरी की धरती पर पहुंचा 308 पहियों वाला महाबली।
दुनियाभर में चर्चा बटोर रहा 308 पहियों वाला विशालकाय ट्रक मंगलवार रात लखीमपुर खीरी जिले में दाखिल हो गया। इस पर लदा करीब 200 टन का विशाल वेसल बलरामपुर चीनी मिल की कुंभी इकाई में स्थापित किया जाना है, जहां बायोपॉलिमर निर्माण से जुड़ी परियोजना विकसित की जा रही है।
इस महाबली का सफर किसी चुनौती से कम नहीं रहा। बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची मशीन को वहां से सड़क मार्ग द्वारा झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के रास्ते लखीमपुर लाया गया।
📍 रास्ते में क्या-क्या हुआ?
▪️ भारी वजन और विशाल आकार के कारण कई जगह वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था करनी पड़ी।
▪️ वाराणसी में ट्रक को निकालने के लिए फुट ओवरब्रिज के हिस्सों को काटकर हटाया गया और क्रेन की मदद से पुल को ऊपर उठाकर रास्ता बनाया गया।
▪️ कुछ स्थानों पर सड़क की स्थिति और दलदली जमीन के कारण भी आगे बढ़ने में मुश्किलें आईं।
▪️ इस विशेष ट्रेलर के साथ इंजीनियरों और तकनीकी कर्मचारियों की टीम भी चल रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके सफर में रोजाना लगभग 200 से 300 लीटर डीजल खर्च हो रहा था।
अब सैकड़ों किलोमीटर की मुश्किल यात्रा तय करने के बाद यह विशालकाय ट्रक लखीमपुर खीरी पहुंच चुका है। 308 पहियों पर लदी इस भारी मशीन को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ उमड़ रही है।
यह सिर्फ एक ट्रक नहीं, बल्कि भारी इंजीनियरिंग, तकनीक और लंबे इंतजार के बाद मंजिल तक पहुंचने की कहानी है।
📢 लखीमपुर के लोगों, क्या आपने 308 पहियों वाले इस महाबली को देखा? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में जरूर बताएं।
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