हजारीबाग में 'डीजल डिप्लोमेसी' पर भड़का आक्रोश: कोयला ढोने वाले हाइवा के लिए अथाह तेल, पर तड़पते मासूमों के अस्पताल के लिए एक बूंद भी नहीं?
कंपनियों की तिजोरियां भरने के लिए चौबीसों घंटे दौड़ रहे त्रिवेणी, बीजीआर और एनटीपीसी के सैकड़ों गाड़ियां, पर शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज के जनरेटर के लिए प्रशासन के पास 'नो स्टॉक' का बहाना!
अस्पताल में सांसों का संकट, पर सड़कों पर कोयला कंपनियों का 'ब्लैक गोल्ड' और डीजल का खेल!
हजारीबाग में शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जो कुछ भी हुआ, उसने प्रशासन की प्राथमिकताओं का ऐसा क्रूर चेहरा सामने लाया है जिसने पूरे झारखंड को हिला कर रख दिया है। एक तरफ अस्पताल का अति संवेदनशील नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) वार्ड अंधेरे में डूबा था, ऑक्सीजन की पाइपलाइन फटने से वेंटिलेटर पर मासूम नवजात सांसों के लिए तड़प रहे थे, और जब अस्पताल के जिम्मेदार अधीक्षक से जनरेटर न चलने का कारण पूछा गया, तो उनका बेहद गैर-जिम्म