पहले प्यार और शादी का जाल... फिर विदेशी गिफ्ट की कहानी; कस्टम अफसर बनकर डराया और खाते से उड़ाए 7.50 लाख
मंदसौर पुलिस ने खोला अंतरराज्यीय साइबर ठगी का नेटवर्क, मुख्य सरगना समेत 6 गिरफ्तार; 11 करोड़ से अधिक की ठगी का प्रारंभिक खुलासा
मंदसौर। मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर एक प्रोफाइल क्या बनी, साइबर ठगों को अपना अगला शिकार मिल गया। पहले एक युवक ने खुद को एनआरआई बताया। बातचीत बढ़ी तो शादी का भरोसा दिलाया। नकली फोटो भेजे गए और कथित परिजनों से व्हाट्सऐप पर बातचीत तक करवाई गई। जब भरोसा पूरी तरह कायम हो गया तो विदेश से महंगे गिफ्ट की कहानी शुरू हुई। इसके बाद कस्टम ड्यूटी और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम मांगी गई। कस्टम अधिकारी बनकर फोन किया और पार्सल नहीं छुड़ाने पर कार्रवाई का डर दिखाया। आखिरकार पीड़िता ने अलग-अलग बैंक खातों में करीब साढ़े 7 लाख रुपये जमा कर दिए।
शिकायत मंदसौर पुलिस तक पहुंची तो मामला केवल एक महिला से हुई ठगी का नहीं निकला। पुलिस की करीब डेढ़ माह की तकनीकी पड़ताल में एक ऐसे अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ियां सामने आईं, जो अलग-अलग राज्यों में बैठकर साइबर ठगी का कारोबार चला रहा था। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा 100 से अधिक साइबर घटनाओं को अंजाम देने और 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
शिकायत ने खोला ठगों का रास्ता
आलमगढ़ निवासी पीड़िता ने मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल अपडेट किया था। इसी दौरान आरोपी ने संपर्क कर खुद को एनआरआई बताया। बातचीत के दौरान नकली फोटो और कथित परिवार के सदस्यों के माध्यम से पीड़िता का विश्वास जीता गया। शादी का भरोसा मिलने के बाद ठगों ने विदेश से गिफ्ट भेजने की बात कही।
कुछ समय बाद फोन आया कि गिफ्ट कस्टम विभाग ने रोक लिया है। इसके बाद कस्टम ड्यूटी, प्रोसेसिंग फीस और पार्सल छुड़ाने के नाम पर रकम मांगी जाने लगी। अलग-अलग नंबरों से कस्टम अधिकारी बनकर फोन किए गए। पीड़िता को डराकर लगातार रकम जमा कराई गई। जब तक उसे पूरे मामले पर शक हुआ, तब तक करीब 7.50 लाख रुपये अलग-अलग खातों में पहुंच चुके थे।
एसपी तक पहुंची शिकायत, बनी विशेष टीम
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार मीना ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपियों की तलाश और गिरोह का पता लगाने के लिए विशेष टीम गठित की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गरोठ रामस्नेही मिश्र और एसडीओपी सीतामऊ दिनेश प्रजापति के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी शामगढ़ उपनिरीक्षक कपिल सौराष्ट्रीय के नेतृत्व में साइबर सेल और थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की।
करीब डेढ़ से दो माह तक पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। मोबाइल नंबर, बैंक खातों और अन्य डिजिटल कड़ियों को जोड़ते-जोड़ते पुलिस आरोपियों के ठिकानों तक पहुंची।
जयपुर से बिहार तक पुलिस की दबिश
आरोपियों की पहचान के बाद पुलिस टीम ने राजस्थान के जयपुर में दबिश दी और आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में मिले सुरागों के आधार पर पुलिस बिहार के अरवल जिले तक पहुंची। वहां से गिरोह के एक अन्य सदस्य को अभिरक्षा में लिया गया। पुलिस के अनुसार मुख्य सरगना सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
150 से ज्यादा म्यूल खाते-सिम का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम सीधे आरोपियों के खातों में नहीं जाती थी। इसके लिए दूसरे लोगों के नाम पर खोले गए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस के अनुसार गिरोह ने 150 से अधिक म्यूल बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम का इस्तेमाल किया।
आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली और बिहार से बड़ी संख्या में सिम हासिल की गईं। कुछ मोबाइल सिम और बैंक खाते भोपाल से भी प्राप्त किए गए थे।
एक टीम का काम सिर्फ खाते उपलब्ध कराना
गिरोह का काम अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ था। एक टीम म्यूल बैंक खाते और मोबाइल सिम उपलब्ध कराती थी। दूसरी टीम अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बनाकर रहती और ठगी की रकम निकालती थी। समय-समय पर ठिकाने भी बदल दिए जाते थे।
गिरोह का एक मुख्य व्यक्ति पूरे लेन-देन को नियंत्रित करता था। किस खाते में रकम जमा हुई, किस खाते से रकम निकालनी है और रकम को किस सीडीएम खाते में जमा करना है, इसकी जानकारी और निर्देश उसी स्तर से दिए जाते थे।
खाता फ्रीज होते ही सबूत मिटाने की तैयारी
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य ठगी में इस्तेमाल मोबाइल और सिम को अपने निजी काम में इस्तेमाल नहीं करते थे। जैसे ही किसी बैंक खाते के फ्रीज होने की जानकारी मिलती, संबंधित मोबाइल, सिम, पासबुक और एटीएम कार्ड नष्ट कर दिए जाते थे। इसके बाद अगली ठगी के लिए नया मोबाइल, नई सिम और नया बैंक खाता इस्तेमाल किया जाता था।
एक फोन, एक मामला
गिरोह की कार्यप्रणाली में एक और खास बात सामने आई। पुलिस के अनुसार प्रत्येक मोबाइल फोन के पीछे एक स्लिप रखी जाती थी, जिस पर संबंधित व्यक्ति का नाम और बैंक खाता नंबर लिखा होता था। उस फोन और सिम का इस्तेमाल उसी मामले में किया जाता था। दूसरे मामले के लिए अलग मोबाइल और सिम का इंतजाम किया जाता था।
22 मोबाइल और 30 सिम बरामद
पुलिस ने आरोपियों से 22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 30 मोबाइल सिम और 5 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। इसके अलावा विभिन्न बैंक खातों में जमा 8 लाख रुपये से अधिक की राशि को फ्रीज कराया गया है। पुलिस के अनुसार न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वैधानिक प्रावधानों के तहत राशि पीड़ित को दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
ये छह आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने त्रिलोकी कुमार, शिवम गुप्ता, बबलू कुशवाह, गुंजन गुप्ता और शशि कुमार, सभी निवासी भेलाही, जिला पूर्वी चंपारण, बिहार तथा टोनी कुमार निवासी छपिया, गोपालगंज, बिहार को गिरफ्तार किया है।
डेढ़ माह जांच, 15 दिन राज्यों में कार्रवाई
पुलिस टीम ने करीब डेढ़ माह तक तकनीकी जांच कर गिरोह की कड़ियां जोड़ीं। इसके बाद करीब 15 दिन तक अलग-अलग राज्यों में रहकर आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। कार्रवाई में थाना शामगढ़, साइबर सेल और अन्य पुलिसकर्मियों की विशेष भूमिका रही।
मंदसौर पुलिस की अपील
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर बने ऑनलाइन रिश्तों में पैसों का लेन-देन करने से पहले पूरी तरह सत्यापन करें। अनजान व्यक्ति के भेजे लिंक पर क्लिक न करें। लुभावने ऑफर और ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर किसी के झांसे में न आएं। पिन, ओटीपी, पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।