प्रेस विज्ञप्ति-5
दिनाँक- 18/07/26 स्थान- नालंदा
डीएम का चैंबर आज बना प्रेरणा का मंच, बच्चियों से खुलकर की बातचीत; कहा- "जो जितना तपता है, उतना ही चमकता है"
● *बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कमरुद्दीनगंज (बिहारशरीफ) की कक्षा छह, सात और आठ की छात्राओं का हुआ शैक्षणिक भ्रमण*
●*बच्चियों को बड़े सपने देखने, लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी लगन और ईमानदारी से मेहनत करने का दिया संदेश*
● *छात्राओं को दिया मुखर होने का मंत्रा*
●*छात्राओं को मिलेगा वोकेशनल ट्रेनिंग*
नालन्दा। आम दिनों में जिला पदाधिकारी का चैंबर प्रशासनिक बैठकों, महत्वपूर्ण निर्णयों और अधिकारियों की आवाजाही के लिए जाना जाता है। यहां का माहौल आमतौर पर गंभीर और औपचारिक रहता है। लेकिन शुक्रवार को समाहरणालय परिसर स्थित नालंदा की जिला पदाधिकारी श्रीमती उदिता सिंह का कार्यालय बिल्कुल अलग रंग में नजर आया। यहां फाइलों और सरकारी चर्चाओं की जगह मासूम मुस्कानें, जिज्ञासा, सपने और प्रेरणा से भरी बातें थीं। अवसर था 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, कमरुद्दीनगंज (बिहारशरीफ) की कक्षा छह, सात और आठ की छात्राओं के शैक्षणिक भ्रमण का। छात्राओं ने समाहरणालय का भ्रमण किया और जिला पदाधिकारी से सीधे संवाद का अवसर प्राप्त किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में जिला पदाधिकारी ने सभी छात्राओं से आत्मीयता के साथ एक-एक कर परिचय प्राप्त किया। उन्होंने बच्चियों से पूछा कि वे भविष्य में क्या बनना चाहती हैं, उनके जीवन के लक्ष्य क्या हैं और पढ़ाई के दौरान उन्हें किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। शुरुआत में छात्राएं संकोच में थीं और खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रही थीं। उनकी झिझक को महसूस करते हुए जिला पदाधिकारी ने औपचारिक बातचीत के बजाय प्रेरणादायक अंदाज में उनसे संवाद शुरू किया।
उन्होंने बच्चियों से कहा कि "लड़कियों और महिलाओं को अपनी भावनाएं, समस्याएं और इच्छाएं खुलकर व्यक्त करनी चाहिए। यदि आप अपनी बात नहीं कहेंगी तो किसी को यह पता ही नहीं चलेगा कि आपकी परेशानी क्या है, आपका सपना क्या है और आपको किस प्रकार की सहायता चाहिए। इसलिए जीवन में कभी चुप मत रहिए। सहना नहीं, कहना है।"
उन्होंने छात्राओं को बताया कि किसी भी प्रकार की परेशानी या संकट की स्थिति में महिलाएं महिला हेल्पलाइन 181 तथा आपातकालीन सेवा 112 पर तत्काल सहायता प्राप्त कर सकती हैं। उन्होंने बच्चियों से कहा कि अपने अधिकारों और उपलब्ध सरकारी सुविधाओं की जानकारी होना ही सशक्त बनने की पहली सीढ़ी है।
जिला पदाधिकारी की सहजता और आत्मीयता ने कुछ ही मिनटों में छात्राओं की झिझक दूर कर दी। उन्होंने बच्चियों से कहा कि अब वे बेझिझक अपने मन के सवाल पूछें। इसके बाद छात्राओं ने उत्साहपूर्वक अनेक प्रश्न पूछे। एक छात्रा ने सवाल किया, "मैडम, आपका सपना क्या था और आप आईएएस कैसे बनीं?"
इस पर जिला पदाधिकारी ने अपने जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनका पहला सपना इंजीनियर बनने का था। उन्होंने कठिन परिश्रम से आईआईटी की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया और लगातार मेहनत के बल पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुईं।
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए जिला पदाधिकारी ने छात्राओं से कहा कि सफलता की असली कीमत तभी समझ में आती है, जब उसे कठिन परिश्रम और लंबे संघर्ष के बाद हासिल किया जाए। उन्होंने कहा, "जितनी जल्दी सफलता मिल जाती है, कई बार उसका महत्व उतना गहराई से महसूस नहीं होता। लेकिन जब लगातार संघर्ष, धैर्य और मेहनत के बाद सफलता मिलती है, तो उसका अर्थ, उसका संदेश और उसकी अहमियत पूरी तरह बदल जाती है।"
उन्होंने बताया कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान कई ऐसे मौके आए, जब उनके साथ पढ़ने वाले मित्र प्रतिष्ठित कंपनियों में अच्छी नौकरियां कर रहे थे, जबकि वह स्वयं अभी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटी थीं। ऐसे समय में मन में कई तरह के विचार आते थे, लेकिन उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया। उन्होंने पूरी निष्ठा और आत्मविश्वास के साथ अपनी तैयारी जारी रखी और अंततः भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर अपने लक्ष्य को हासिल किया।
संघर्ष के महत्व को समझाते हुए जिला पदाधिकारी ने भगवान श्रीराम का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जन्म राजघराने में हुआ था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वनवास जाना पड़ा। उन्होंने अनेक कठिनाइयों का सामना किया, अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष किया तथा अंततः रावण का वध कर धर्म की स्थापना की। इन्हीं संघर्षों, त्याग और मर्यादा के कारण श्रीराम केवल एक आदर्श राजा ही नहीं, बल्कि भगवान के रूप में पूजे जाते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली कठिनाइयां इंसान को मजबूत बनाती हैं और वही उसके व्यक्तित्व को ऊंचाइयों तक पहुंचाती हैं।
उन्होंने बच्चियों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा, "जो जितना तपता है, वह उतना ही चमकता है। ठीक सूर्य की तरह। जीवन में संघर्ष आएं तो उन्हें बोझ नहीं, अवसर समझिए। कई बार कठिन समय उस क्षण अच्छा नहीं लगता, लेकिन वही संघर्ष भविष्य को मजबूत बनाता है और जीवन को नया अर्थ देता है।"
उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संघर्ष से सफलता तक की यात्रा का एक बड़ा उदाहरण हैं। जीवन में चुनौतियां आएं तो उनसे घबराने के बजाय उन्हें सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करना चाहिए। संघर्ष व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारता है और भविष्य को उज्ज्वल बनाता है।
जिला पदाधिकारी ने बच्चियों को बड़े सपने देखने, लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी लगन और ईमानदारी से मेहनत करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। निरंतर परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास ही सफलता की असली कुंजी है।
जिला पदाधिकारी ने बच्चियों से कहा कि आज उन्होंने जो कुछ सीखा है, उसे केवल अपने तक सीमित न रखें। अपने परिवार, मित्रों और आसपास के समाज के लोगों तक भी यह जानकारी पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि "जब हमारी बेटियां जागरूक होंगी, आत्मविश्वासी होंगी और समाज को जागरूक करेंगी, तभी वास्तव में एक सशक्त और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण होगा।"
संवाद के दौरान छात्राओं ने जिला पदाधिकारी के समक्ष अपनी कुछ व्यावहारिक जरूरतें भी रखीं। उन्होंने विद्यालय में सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी एंड वेलनेस जैसे व्यावसायिक (वोकेशनल) प्रशिक्षण के साथ-साथ नृत्य एवं संगीत की नियमित कक्षाएं शुरू कराने की मांग की। छात्राओं ने कहा कि ऐसी गतिविधियों से उनकी प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ भविष्य में स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। बच्चियों की मांग को गंभीरता से सुनते हुए जिला पदाधिकारी श्रीमती उदिता सिंह ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ कौशल विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से इन गतिविधियों के संचालन की संभावनाओं का आकलन कर आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा, ताकि बच्चियों के सर्वांगीण विकास का मार्ग और मजबूत हो सके।
अंत में जिला पदाधिकारी ने सभी छात्राओं से उत्साहपूर्वक एक स्वर में संकल्प दिलाया। उन्होंने बच्चियों से बुलवाया— "हम बड़े होकर अपने माता-पिता का नाम रोशन करेंगे, अपने विद्यालय का नाम रोशन करेंगे, नालंदा जिले का नाम रोशन करेंगे और अपने देश भारत का नाम रोशन करेंगे।" छात्राओं ने पूरे आत्मविश्वास और जोश के साथ इस संकल्प को दोहराया।
संवाद कार्यक्रम के बाद जिला पदाधिकारी के निर्देश पर छात्राओं को जिला मुख्यालय के विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यालयों का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया। इस दौरान उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम में कानून-व्यवस्था की निगरानी की प्रक्रिया, लोक शिकायत निवारण कार्यालय में आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान की व्यवस्था, व्यवहार न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया, वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं को उपलब्ध कराई जाने वाली सहायता सेवाओं तथा आरटीपीएस काउंटर पर विभिन्न सरकारी प्रमाण-पत्रों एवं सेवाओं की ऑनलाइन व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) श्रीमती अर्चना कुमारी, जिला परियोजना प्रबंधक, महिला एवं बाल विकास निगम तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की वार्डन सहित अन्य अधिकारी एवं शिक्षिकाएं भी उपस्थित रहीं। छात्राओं के लिए यह भ्रमण केवल प्रशासनिक व्यवस्था को समझने का अवसर नहीं था, बल्कि आत्मविश्वास, नेतृत्व और बड़े सपने देखने की प्रेरणा देने वाला एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
Samrat Choudhary
CMO Bihar
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Bihar Education Department
ICDS Directorate Bihar
Women and Child Development Corporation, Bihar
9 views | Nalanda, Bihar | Jul 18, 2026