आजादी के 7 दशक बाद भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण!
चाईबासा के सोनुआ क्षेत्र के बनुआ और सोनापोस गाँव के ग्रामीणों का दर्द अब आंदोलन का रूप ले चुका है। आजादी के 76 साल बाद भी यहाँ के लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। गाँव के चापाकल सूखे हैं और महिलाओं को 2 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है। 15 साल पहले बनी जलापूर्ति योजना आज भी सिर्फ कागजों और सफेद हाथी की तरह खड़ी है।
अब और नहीं! आजसू नेता अमित महतो और डॉ० दिनेश चंद्र बोयपाई के नेतृत्व में ग्रामीणों ने "पेयजल जन आंदोलन" का बिगुल फूंक दिया है। ग्रामसभा कर उपायुक्त (DC) के नाम मांगपत्र तैयार किया गया है। प्रशासन को 1 महीने का अल्टीमेटम दिया गया है, अगर समाधान नहीं हुआ तो जिला और प्रखंड कार्यालय में आमरण अनशन होगा।
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