आस्था और तपस्या का अद्भुत उदाहरण इन दिनों क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। बालक दास बाल ब्रह्मचारी संत नर्मदा की कठिन दंडवत परिक्रमा करते हुए अखंड ज्योत लेकर नगर पहुंचे। वे पग-पग जमीन पर लेटकर नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि उनके शरीर पर एक साधारण गमछा तक नहीं है और वे धूप में, खुले आसमान के नीचे यह कठिन साधना कर रहे हैं।