संसार पोखर से मिली पालकालीन दुर्लभ प्रतिमा लखीसराय संग्रहालय में सुरक्षित
लखीसराय। जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संसार पोखर के समीप मिट्टी की खुदाई के दौरान प्राप्त प्राचीन दुर्लभ प्रतिमा को शनिवार को विधिवत रूप से लखीसराय संग्रहालय में स्थानांतरित कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, संसार पोखर क्षेत्र में खुदाई के दौरान लगभग दो फीट ऊंची काले प्रस्तर की एक प्राचीन प्रतिमा मिली थी। सुरक्षा के मद्देनजर इसे स्थानीय कवैया थाना में सुरक्षित रखा गया था। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सह सहायक संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. मृणाल रंजन को 17 जून को अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा इसकी सूचना दी गई थी। इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए 20 जून 2026 को कवैया थानाध्यक्ष रंधीर कुमार ने प्रतिमा को औपचारिक रूप से संग्रहालय प्रशासन को सौंप दिया।संग्रहालय के तकनीकी सहायक राजेश कुमार द्वारा किए गए प्रारंभिक परीक्षण एवं अवलोकन में प्रतिमा की पहचान ‘जाम्भल’ के रूप में की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रतिमा 9वीं से 12वीं शताब्दी ईस्वी के बीच के पालकाल की प्रतीत होती है और उस दौर की उत्कृष्ट मूर्तिकला का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
हालांकि समय के प्रभाव और ऐतिहासिक परिस्थितियों के कारण प्रतिमा का सिर, दाहिना हाथ तथा बाएं हाथ का कुछ हिस्सा खंडित हो चुका है, फिर भी शेष संरक्षित भागों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी तत्कालीन शिल्पकला की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है।संग्रहालय प्रशासन का मानना है कि यह प्रतिमा न केवल लखीसराय के गौरवशाली इतिहास का महत्वपूर्ण साक्ष्य है, बल्कि क्षेत्र की पुरातात्विक एवं सांस्कृतिक धरोहर को समझने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अब इसे संग्रहालय में सुरक्षित रखकर इसके संरक्षण और विस्तृत अध्ययन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।