लखनऊ: “मारपीट हमारे साथ हुई, FIR हमारे खिलाफ दर्ज कर दी गई”—दुबग्गा मामले में आरोपित पक्ष ने उठाए सवाल
कार मालिक पक्ष का दावा—घटना वाले दिन ही चौकी इंचार्ज को दिया था प्रार्थना पत्र, सुनवाई न होने का आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग
लखनऊ। दुबग्गा थाना क्षेत्र में वाहन संख्या UP32XN5943 से जुड़े कथित मारपीट प्रकरण में अब आरोपित पक्ष ने अपना पक्ष रखते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। आरोपित पक्ष का कहना है कि घटना वाले दिन ही उन्होंने नजदीकी पुलिस चौकी के प्रभारी को प्रार्थना पत्र देकर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद दूसरे पक्ष के प्रार्थना पत्र पर एफआईआर दर्ज कर दी गई।
आरोपित पक्ष के अनुसार, घटना में मारपीट उनके साथ हुई थी, लेकिन कार्रवाई उनके ही खिलाफ हो गई। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और घटना के समय दिए गए उनके प्रार्थना पत्र को भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।
क्या है विवाद?
उपलब्ध पुलिस आख्या के मुताबिक, शिकायतकर्ता राजेश कुमार वर्मा ने 28 सितंबर 2026 को प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें 21 सितंबर 2026 की सुबह करीब 8:30 बजे कार से जुड़े विवाद के दौरान गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाया गया। शिकायत में दाहिने हाथ की उंगली टूटने की बात भी कही गई है।
पुलिस आख्या में मुकदमा संख्या 0288/2026 तथा बीएनएस की धारा 115(2), 117(2) और 352 का उल्लेख दिखाई देता है। आख्या के अनुसार, मामले की विवेचना जारी है और वाहन स्वामी व चालक से संपर्क करने के प्रयास किए गए हैं।
आरोपित पक्ष के दावे की भी जांच जरूरी
आरोपित पक्ष का दावा है कि उसने घटना के दिन ही पुलिस चौकी में अपनी शिकायत दी थी। हालांकि, फिलहाल उस प्रार्थना पत्र की प्रति, उसकी प्राप्ति का प्रमाण, मेडिकल रिपोर्ट और दोनों पक्षों के बयानों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि पहले दिए गए प्रार्थना पत्र पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की थी और दोनों पक्षों के आरोपों में तथ्यात्मक स्थिति क्या है।
निष्पक्ष जांच की मांग
मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घटना के दिन दिए गए कथित प्रार्थना पत्र का पुलिस रिकॉर्ड में उल्लेख है या नहीं, दोनों पक्षों की चोटों का मेडिकल परीक्षण हुआ था या नहीं और विवेचना में उपलब्ध साक्ष्यों को किस तरह शामिल किया जा रहा है।
जन हुंकार न्यूज़ का पक्ष: मामले में दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। संबंधित पुलिस अधिकारी और दूसरे पक्ष का आधिकारिक जवाब मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए। फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोप को जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता।
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Bilgram, Hardoi | Oct 23, 2026