जातीय राजनीति पर जिला पंचायत सदस्य अमित मैखंडी का बड़ा हमला, कांग्रेस से पूछा—आजादी के बाद दशकों तक सत्ता में रहे, फिर अनुसूचित समाज के गांव पिछड़े क्यों?
कहा—देवभूमि को जातियों के नाम पर बांटने की कोशिश स्वीकार नहीं, यहां जाति नहीं आस्था और भाईचारा बड़ा, देवरा यात्रा में एक साथ चल रहा पूरा समाज!!
केदारघाटी के त्रियुगीनारायण क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य अमित मैखंडी ने उत्तराखंड में जातीय राजनीति को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों के जरिए समाज को जाति के नाम पर बांटने के प्रयासों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से सीधा सवाल किया कि यदि वह अनुसूचित समाज की इतनी बड़ी हितैषी है तो आजादी के बाद लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद अनुसूचित समाज के अनेक गांव आज भी गरीबी, पिछड़ेपन और मूलभूत सुविधाओं की कमी से क्यों जूझते रहे?
अमित मैखंडी ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक अवसरों के क्षेत्र में अनुसूचित समाज को अपेक्षित प्रगति क्यों नहीं मिल पाई, इसका जवाब कांग्रेस को देश और समाज के सामने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए जातीय विभाजन की कोशिश देवभूमि उत्तराखंड की मूल संस्कृति के खिलाफ है।
‘रविदास, अंबेडकर और विश्वकर्मा किसी एक समाज के नहीं, पूरे राष्ट्र के गौरव’
जिला पंचायत सदस्य ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास जी, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी और भगवान विश्वकर्मा जी किसी एक जाति या समाज तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे राष्ट्र के गौरव हैं। उनके नाम पर राजनीति करने के बजाय उनके विचारों को समाज में उतारने की आवश्यकता है।
उन्होंने केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सामाजिक समरसता तथा ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना से किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित किया गया और उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया गया।
संत रविदास जी की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए मैखंडी ने कहा कि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा संत रविदास जी के सम्मान में आयोजित कलश यात्रा में शामिल होकर उसका स्वागत करना सामाजिक समरसता की भावना को दर्शाता है।
देवरा यात्रा को बनाया उदाहरण, बोले—‘मां की डोली के साथ जाति नहीं, आस्था चलती है’
अमित मैखंडी ने केदारघाटी में चल रही अपनी आराध्य मां महिषमर्दिनी देवी की देवरा यात्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि यात्रा में ठाकुर, राजपूत, ब्राह्मण, अनुसूचित समाज समेत विभिन्न वर्गों के लोग एक साथ श्रद्धा और भाईचारे के साथ शामिल हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यही उत्तराखंड की असली पहचान है। यहां जाति नहीं, आस्था बड़ी है। यहां भेदभाव नहीं, भाईचारा बड़ा है और यहां राजनीति नहीं, देवभूमि की संस्कृति बड़ी है।”
उन्होंने कहा कि देवरा यात्राएं उत्तराखंड की सामाजिक एकता का जीवंत उदाहरण हैं। जब मां की डोली निकलती है तो समाज के सभी वर्ग उसके साथ कदम से कदम मिलाकर चलते हैं। उस समय किसी की जाति नहीं पूछी जाती, सभी की आस्था और श्रद्धा समान होती है।
‘राजनीति में मतभेद हों, लेकिन मनभेद नहीं’
मैखंडी ने कांग्रेस नेताओं से अपील करते हुए कहा कि देवभूमि को जातियों के नाम पर बांटने की कोशिश न की जाए। राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन समाज अलग नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित समाज हो या सामान्य वर्ग, ब्राह्मण हो या राजपूत, व्यापारी हो या किसान—सभी देवभूमि के नागरिक हैं और सभी का भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा है।
‘वोट बैंक नहीं, विकास चाहिए’
अपने संदेश के अंत में अमित मैखंडी ने कहा कि अब समय वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर समाज को जोड़ने का है।
“देवभूमि में जातीय विभाजन नहीं, सामाजिक समरसता चाहिए। नफरत नहीं, भाईचारा चाहिए। वोट बैंक नहीं, विकास चाहिए।”
उनके इस बयान को उत्तराखंड की राजनीति में जातीय मुद्दे पर एक सीधा और तीखा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।