सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूरे, गर्भवती महिलाओं की जांच और जागरूकता के लिए जिलेभर में विशेष शिविर
• “सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ माँ, सशक्त भारत” थीम के साथ स्वास्थ्य केंद्रों पर हुआ विशेष आयोजन
• उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान और समय पर इलाज से मातृ मृत्यु दर में कमी लाने पर जोर
छपरा। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व, गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच और समय पर विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) ने मंगलवार को अपने 10 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर सारण जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, अनुमंडलीय अस्पतालों और जिला अस्पतालों में विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर, परामर्श सत्र और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान की इस वर्ष की थीम “प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष : सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ माँ, सशक्त भारत” रखी गई है।
सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि पिछले एक दशक में इस अभियान ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अभियान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसव पूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की समय पर पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श तथा जरूरत पड़ने पर बेहतर स्वास्थ्य संस्थानों में रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह की समय पर पहचान
डीपीएम अरविन्द कुमार ने बताया कि नियमित एएनसी (Antenatal Check-up) जांच के दौरान गर्भवती महिलाओं में एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कुपोषण और अन्य जटिलताओं की पहचान आसानी से हो जाती है। समय पर उपचार मिलने से प्रसव संबंधी जोखिम कम होते हैं और नवजात शिशु के स्वास्थ्य में भी सुधार आता है। उन्होंने कहा कि सुरक्षित संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने में भी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में लगे विशेष शिविर
अभियान की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर जिले के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पहली तिमाही की गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष शिविर लगाए गए। यहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण, रक्त जांच, रक्तचाप मापन, वजन जांच और आवश्यक परामर्श दिया गया। वहीं दूसरी और तीसरी तिमाही की गर्भवती महिलाओं को अनुमंडलीय अस्पताल, जिला अस्पताल और फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा जांच और परामर्श उपलब्ध कराया गया।
प्रसव के बाद 45 दिनों तक होगी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित एक्सटेंडेड प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान कर प्रसव के बाद 45 दिनों तक विशेष निगरानी की जाएगी। स्वास्थ्यकर्मी नियमित रूप से इन महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखेंगे ताकि प्रसवोत्तर जटिलताओं को रोका जा सके।
गर्भावस्था में नियमित जांच बेहद जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मातृ मृत्यु के प्रमुख कारणों में अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप, संक्रमण और एनीमिया शामिल हैं। इनमें से अधिकांश मामलों को नियमित जांच और समय पर इलाज से रोका जा सकता है। सुरक्षित मातृत्व केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार और समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। जागरूकता, नियमित जांच और समय पर उपचार से ही स्वस्थ माँ और स्वस्थ शिशु का सपना साकार किया जा सकता है।
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Bihar Health Department
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11 views | Saharsa, Bihar | Jun 9, 2026