डीडवाना में ट्रैफिक सिस्टम फेल: रेंग रहा शहर, जाम में 5 मिनट तक फंसी रही पुलिस की गाड़ी
दिखावे की चालानी कार्रवाई पर उठे सवाल: 12 घंटे गाड़ी खड़ी करने वाले 'रसूखदारों' पर मेहरबानी, 2 मिनट रुकने वाले आम लोगों के काटे जा रहे चालान।
डीडवाना।शहर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था अब आम जनता के साथ-साथ खुद प्रशासन के लिए भी गले की फांस बनती जा रही है। डीडवाना के मुख्य बाजारों, चौराहों और गली-मोहल्लों में ट्रैफिक जाम का यह आलम है कि अब आपातकालीन वाहनों का निकलना भी नामुमकिन साबित हो रहा है। इसका एक ताजा और हैरान करने वाला नजारा आज शहर के बीचों-बीच देखने को मिला, जहां कानून व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाली पुलिस की गाड़ी खुद ट्रैफिक जाम के चक्रव्यूह में फंस गई। पुलिस वाहन करीब 4 से 5 मिनट तक जाम में बेबस खड़ा रहा और रेंगता नजर आया। जब खाकी का यह हाल है, तो किसी गंभीर मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस की क्या स्थिति होती होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।शहर के किसी भी गली-मोहल्ले या मुख्य मार्ग पर नजर दौड़ाई जाए, तो हर जगह बिना सुध-बुध के वाहन खड़े कर लोग गायब हो जाते हैं। कई वाहन तो सुबह से लेकर रात तक, यानी 12 से 24 घंटे तक सड़कों पर ही खड़े रहते हैं। इस बेतरतीब और अवैध पार्किंग के कारण सड़कों की चौड़ाई आधी रह गई है। इस लापरवाही की सबसे बड़ी मार स्थानीय व्यापारियों के व्यापार और पैदल चलने वाले राहगीरों पर पड़ रही है, लेकिन इस गंभीर समस्या को देखने वाला कोई नहीं है।स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों का आरोप है कि पुलिस और नगर परिषद प्रशासन यातायात सुधारने के नाम पर केवल रस्म अदायगी कर रहा है। शहर में चालान की कार्रवाई तो रोज होती है, लेकिन यह कार्रवाई केवल उन मजबूर और आम लोगों पर होती है जो अपने रोजमर्रा के काम से बाजार आते हैं और महज 2 या 5 मिनट के लिए गाड़ी खड़ी करते हैं। इसके विपरीत, जो रसूखदार लोग 12-12 घंटे तक बीच सड़क पर गाड़ियां पार्क करके चले जाते हैं, उनके खिलाफ कोई सुध नहीं ली जाती और न ही उनके वाहनों को जब्त किया जाता है।प्रशासन की इस भेदभावपूर्ण और ढीली कार्रवाई को लेकर शहर के व्यापारियों और आम लोगों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब तक परमानेंट अवैध पार्किंग करने वालों पर सख्त कानूनी डंडा नहीं चलेगा और बिना भेदभाव के बड़े वाहनों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक डीडवाना को इस रोजाना के नरक और जाम से मुक्ति नहीं मिल सकती।