देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रतीक माने जाने वाली स्थान से उठी यह तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। यहां बंदूकें किसी आतंकवादी या अपराधी की ओर नहीं, बल्कि अपने ही देश के छात्रों की ओर तनी दिखाई दीं। उनका कसूर सिर्फ इतना है कि वे पारदर्शी परीक्षाएं, निष्पक्ष भर्तियां और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। लोकतंत्र में अपनी आवाज़ उठाना अधिकार है, लेकिन यदि इन मांगों का जवाब हथियारों और बल प्रयोग से दिया जाए, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
Pauri, Garhwal | Jul 20, 2026