आधुनिक एवं प्राकृतिक कृषि से आत्मनिर्भरता की मिसाल: गीता तेकाम बनीं जिले की प्रेरणा
ग्रामीण भारत में कृषि को केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसाय के रूप में स्थापित करने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मध्यप्रदेश के मंडला जिले के विकासखंड बीजाडांडी अंतर्गत ग्राम लावर मुड़िया की निवासी श्रीमती गीता तेकाम ऐसी ही एक प्रेरणादायक महिला कृषक हैं, जिन्होंने आधुनिक तकनीकों और प्राकृतिक खेती के समन्वय से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है।
शिक्षा से खेती तक का प्रेरक सफर
स्नातकोत्तर (एम.ए.) शिक्षित गीता तेकाम के सामने रोजगार के अनेक विकल्प थे, लेकिन उन्होंने कृषि को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। दृढ़ संकल्प, निरंतर सीखने की इच्छा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बल पर उन्होंने पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़ते हुए कृषि को लाभकारी उद्यम में परिवर्तित कर दिया।
गीता तेकाम का मानना है कि “दृढ़ संकल्प, तकनीकी नवाचार और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों का समन्वय ही कृषि को लाभकारी व्यवसाय में परिवर्तित कर सकता है।”
विभागीय मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी
गीता की सफलता के पीछे कृषि विभाग एवं आत्मा परियोजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विभाग द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से उन्होंने जैविक खेती, उन्नत बीज चयन, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा जैविक कीट नियंत्रण जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया।
आत्मा योजना के सहायक तकनीकी प्रबंधक श्री मोहित गोल्हानी द्वारा समय-समय पर खेतों का भ्रमण कर दिए गए तकनीकी सुझावों से उनकी खेती की उत्पादकता और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण से बढ़ी आय
गीता तेकाम ने परंपरागत फसलों तक सीमित रहने के बजाय बाजार की मांग को समझते हुए चिया सीड और किनोवा जैसी उच्च मूल्य वाली सुपरफूड फसलों की खेती शुरू की। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए जीवामृत, घनजीवामृत एवं घर पर तैयार जैविक खादों का उपयोग किया।
मिश्रित एवं बहुफसली खेती की पद्धति अपनाने से भूमि की उर्वरता सुरक्षित रही, उत्पादन लागत घटी और जोखिम भी कम हुआ। परिणामस्वरूप उनकी खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन गई।
कृषि सखी बनकर बदल रहीं गांव की तस्वीर
गीता तेकाम की कार्यकुशलता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत कृषि सखी के रूप में चयनित किया गया। आज वे स्वयं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपने गांव एवं आसपास के लगभग 125 किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं।
उनकी पहल से क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ी है और अनेक किसान कम लागत एवं अधिक लाभ वाली खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
सीमित संसाधनों में हासिल की बड़ी सफलता
आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती और बेहतर विपणन प्रबंधन के माध्यम से गीता तेकाम ने अपनी कृषि आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।
वार्षिक वित्तीय उपलब्धियाँ
1. कुल सकल आय 4,06,850 रूपए
2. कुल उत्पादन लागत 1,04,000 रूपए
3. शुद्ध वार्षिक लाभ 3,02,850 रूपए
यह उपलब्धि दर्शाती है कि सीमित संसाधनों में भी वैज्ञानिक प्रबंधन और नवाचार के माध्यम से कृषि को एक सफल एवं लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।
सम्मान और प्रेरणा का केंद्र
कृषि क्षेत्र में किए गए नवाचारों एवं उत्कृष्ट कार्यों के लिए गीता तेकाम को आत्मा योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय प्रगतिशील महिला कृषक सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।
आज उनकी सफलता की कहानी केवल बीजाडांडी विकासखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मंडला जिले में महिला किसानों, स्वयं सहायता समूहों और युवा कृषकों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बन चुकी है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही लाभ लिया जाए, तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हो और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कार्य किया जाए, तो कृषि के माध्यम से आत्मनिर्भरता और समृद्धि दोनों हासिल की जा सकती हैं।
गीता तेकाम आज उस नई ग्रामीण महिला शक्ति का प्रतीक हैं, जो खेतों में नवाचार, आत्मविश्वास और नेतृत्व के साथ भारत की कृषि को नई दिशा दे रही है।
Jansampark Madhya Pradesh
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Ministry of Agriculture & Farmer’s Welfare, Government of India
3 views | Mandla, Madhya Pradesh | Jun 16, 2026