जब वर्दी से परे, इंसानियत ने संभाली कमान! 🐂❤️
बागेश्वर के नदीगांव के पास गोमती नदी का किनारा... एक बेजुबान, घायल बछड़ा जो दर्द से कराह रहा था, गहरी ढलान और पथरीले रास्ते के बीच ऐसा फंसा था कि उसका खुद उठ पाना नामुमकिन था। घटनास्थल सड़क मार्ग से करीब 500 मीटर दूर था, जहां गाड़ी का पहुंचना तो दूर, पैदल उतरना भी किसी चुनौती से कम नहीं था।
जब फायर स्टेशन बागेश्वर की टीम को सूचना मिली, तो बिना एक पल गंवाए रेस्क्यू यूनिट मौके के लिए दौड़ पड़ी। आधे किलोमीटर का रास्ता पैदल तय कर जब टीम नदी के तट पर पहुंची, तो बछड़े की दयनीय हालत देख किसी का भी दिल पसीज जाए। वह दर्द से बेहाल था और चलने में पूरी तरह असमर्थ था।
मुसीबत बड़ी थी, लेकिन हमारे जांबाज़ जवानों के हौसले उससे भी बड़े थे। बिना संसाधनों के इंतजार किए, टीम ने अपनी सूझबूझ का परिचय दिया—मौके पर ही दो मजबूत लकड़ियों की मदद से एक कृत्रिम स्ट्रेचर तैयार किया गया।
पूरी सावधानी और संवेदनशीलता के साथ घायल बछड़े