बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे बना ‘हादसों का एक्सप्रेसवे’, कुछ ही घंटों में दो बड़े हादसे — एक की मौत, दर्जनों घायल
जालौन में रविवार की सुबह बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर दर्द और अफरा-तफरी लेकर आई। कुछ ही घंटों के भीतर दो भीषण सड़क हादसों ने न सिर्फ एक युवक की जान ले ली, बल्कि दर्जनों मजदूरों को घायल कर दिया।
इन लगातार हादसों ने एक्सप्रेसवे की सुरक्षा व्यवस्था, तेज रफ्तार वाहनों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहला हादसा: मजदूरों से भरी डीसीएम पलटी
सुबह के वक्त छिरिया सलेमपुर के पास एक बड़ा हादसा हुआ, जब अलीगढ़ से महोबा जा रही मजदूरों और उनके परिवारों से भरी डीसीएम अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। वाहन में ईंट-भट्टों पर काम करने वाले श्रमिक अपने घर लौट रहे थे।
हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। बच्चे, महिलाएं और पुरुष सड़क पर तड़पते नजर आए।
सूचना मिलते ही जालौन पुलिस, एक्सप्रेसवे पेट्रोलिंग टीम और एंबुलेंस मौके पर पहुंची।
स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को तत्काल सीएचसी जालौन भेजा गया।
कई मजदूर घायल हुए, जिनमें से 3 की हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल उरई रेफर किया गया।
दूसरा हादसा: तेज रफ्तार डंपर ने ली जान
पहले हादसे के कुछ ही घंटों बाद, सुबह करीब 8 बजे एक्सप्रेसवे के माइल स्टोन 208.5 पर एक और भीषण टक्कर हो गई।
एक तेज रफ्तार डंपर पीछे से खड़े ट्रक में जा घुसा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार क्लीनर बुरी तरह फंस गया।
मृतक की पहचान छोटू उर्फ अरुण कुमार (22 वर्ष), निवासी भोजला, झांसी के रूप में हुई।
पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
हादसे के बाद डंपर चालक मौके से फरार हो गया।
सवालों के घेरे में एक्सप्रेसवे
लगातार हुए इन हादसों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—
- क्या एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार पर नियंत्रण नहीं है?
- क्या भारी वाहनों की निगरानी में लापरवाही हो रही है?
- क्या पेट्रोलिंग और सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है?
प्रशासनिक कार्रवाई
- जालौन पुलिस ने दोनों मामलों में जांच शुरू कर दी है
- शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया
- फरार डंपर चालक की तलाश जारी
- एक्सप्रेसवे अथॉरिटी को भी सूचना दी गई
राहत की खबर
घायल मजदूरों का इलाज जारी है और अधिकांश की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है, लेकिन लगातार हादसों ने इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल बना दिया है।
निष्कर्ष:
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, जो विकास की रफ्तार का प्रतीक माना जाता है, अब लापरवाही और तेज रफ्तार की वजह से मौत का रास्ता बनता नजर आ रहा है। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हादसे और भी जानें ले सकते हैं।
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Kalpi, Jalaun | Jun 14, 2026