शोलेश्वर महादेव के पथ पर ....रणथंभौर के घने जंगल में भोलेनाथ के दरबार तक…
कल रणथंभौर के घने जंगलों के बीच स्थित शोलेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित मेले में शामिल होने का अवसर मिला... जंगल के बीच बसे इस प्राचीन और आस्था से जुड़े मंदिर तक पहुंचना अपने आप में एक अलग अनुभव है....
सवाई माधोपुर शहर से करीब 9 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता तय करके श्रद्धालु शोलेश्वर महादेव के दरबार तक पहुंचते हैं....
रास्ता आसान नहीं है, लेकिन बरसात के मौसम में यही कठिन रास्ता खूबसूरत सफर में बदल जाता है। कहीं पानी के झरने रास्ते को छूते हुए बह रहे थे, तो कहीं जंगल की हरियाली आंखों को ठहर जाने पर मजबूर कर रही थी। कई जगह रास्ते पानी से भरे हुए थे और पहाड़ों से रिस-रिसकर आता प्राकृतिक, निर्मल पानी इस सफर की खूबसूरती को और बढ़ा रहा था.....
कुछ श्रद्धालु बोदल वाले मार्ग से भी मंदिर पहुंचते हैं, जो अपेक्षाकृत छोटा रास्ता माना जाता है। लेकिन दोनों ही रास्तों की अपनी अलग खूबसूरती है—एक तरफ जंगल, दूसरी तरफ पहाड़ और बीच में प्राकृतिक सुंदरता...
मंदिर पहुंचते ही मेले का माहौल, श्रद्धालुओं की भीड़ और हर तरफ गूंजता “हर-हर महादेव” मन को एक अलग ही शांति देता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए। हर साल की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी वितरण की व्यवस्था की गई थी।
शोलेश्वर महादेव की यह यात्रा सिर्फ मंदिर तक पहुंचने की यात्रा नहीं है…
यह आस्था, जंगल, पहाड़, बरसात और प्रकृति के बीच से गुजरता हुआ एक ऐसा अनुभव है, जिसे शब्दों में पूरी तरह समेट पाना मुश्किल है।
कुछ यात्राएं मंजिल के लिए नहीं, बल्कि रास्ते में मिलने वाले अनुभवों के लिए याद रह जाती हैं…
शोलेश्वर महादेव की यह यात्रा भी उन्हीं में से एक रही।
हर हर महादेव! 🙏