छत्तीसगढ़ का अम्बिकापुर-रायगढ़ NH-43 सालों से सड़क नहीं, बल्कि ‘मौत का दलदल’ बनी हुई है। जनता रोज गिर रही थी, स्कूली बच्चियां कीचड़ में घिसट रही थीं और लोग गंदे पानी में नहाकर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन हुक्मरानों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। मगर एक दिन पहले जैसे ही भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय की लग्जरी गाड़ी गड्ढों में फंसी और प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी को डांट पड़ी, कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन 24 घंटे में जेसीबी लेकर दौड़ पड़ा। क्या सिस्टम की रीढ़ की हड्डी सिर्फ सत्ताधारी आकाओं की गाड़ी में हिचकोला लगने पर ही हिलती है?
जब सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों का जर्जर सड़क को लेकर विरोध बढ़ता जा रहा था, तो गड्ढों में बड़े-बड़े नुकीले बोल्डर ठूंसकर ‘थूक-पॉलिश’ कर दी गई, जिससे बाइक सवारों की जान पर और आफत बन आई है। जनता का सीधा सवाल है, वोट आम जनता से और काम सिर्फ वीआईपी के लिए? अगर यही 'गड्ढा पॉलिटिक्स' और भ्रष्टाचार का खेल जारी रहा, तो अगला धरना सड़क पर नहीं, बल्कि जिम्मेदार नेताओं और अफसरों के बंगलों के सामने होगा!
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