शोभागपुरा की बेटी, शोभागपुरा की बहू — आपकी अपनी, इंदिरा डांगी"
नमस्ते वार्ड 76 के मेरे प्यारे परिवारजनों,
जिस माटी में खिलखिलाते हुए मेरा बचपन बीता, जहाँ की गलियों में मैंने चलना सीखा और जहाँ की छाँव में पली-बढ़ी... ईश्वर की असीम कृपा और आप सबके आशीर्वाद से, वही शोभागपुरा मेरी जन्मभूमि भी बनी और मेरी कर्मभूमि भी।
शोभागपुरा की बेटी होने के नाते इस क्षेत्र के हर घर से मेरा खून का रिश्ता है, और शोभागपुरा की बहू बनकर आने के बाद यह रिश्ता और भी गहरा व अटूट हो गया है। इस माटी की हर एक खुशी, हर एक समस्या और हर एक ज़रूरत को मैंने बहुत करीब से महसूस किया है।
शिक्षा और सार्वजनिक जीवन का अनुभव:
शिक्षित होना ही समाज की सच्ची सेवा का आधार बनता है। स्नातक (Graduation) तक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद, मैंने सदैव यही प्रयास किया कि अपनी शिक्षा और समझ का उपयोग अपने क्षेत्र के लोगों के हित में कर सकूं। राजनीति और समाज सेवा मेरे परिवार के संस्कारों में रही है।
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