हरियाणा कला परिषद द्वारा 20 दिवसीय सारंगी कार्यशाला में युवाओं ने सीखे सारंगी वादन के गुर
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कुरुक्षेत्र (राष्ट्रीय कदम) ब्यूरो। हरियाणा कला परिषद एवं गुरु गोरखनाथ कला समिति के संयुक्त तत्वावधान में रोहतक के ग्रामीण अंचल समरगोपालपुर में 20 दिवसीय सारंगी कार्यशाला का आयोजन किया गया। ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए आयोजित कार्यशाला में स्थानीय प्रतिभाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सांरगी वादक धुनिनाथ द्वारा आयोजित कार्यशाला के समापन पर हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी मुख्यअतिथि के रुप में उपस्थित रहे। उन्होंने ने सभी युवा कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि सारंगी हमारे लोक जीवन की आवाज़ है और हरियाणवी संस्कृति की सबसे अनमोल धरोहर है। हमारी रागनी, सांग और लोकगाथाएं इस वाद्य यंत्र की सुरीली गूंज के बिना अधूरी हैं। गुरु गोरखनाथ कला समिति का यह संयुक्त प्रयास सराहनीय है। जोशी ने प्रदेश के युवाओं से विशेष आह्वान करते हुए कहा कि वे अपनी गौरवशाली लोककला एवं संस्कृति की अनमोल विधाओं से जुड़ें, इन्हें सीखें और अपनी समृद्ध विरासत को वैश्विक पटल पर ले जाने के लिए आगे आएं। इस मौके पर कार्यशाला प्रशिक्षक धुनिनाथ ने हरियाणा कला परिषद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यशाला का मूल उद्देश्य हमारी समृद्ध लोक संगीत परंपरा, विशेषकर सारंगी वादन की प्राचीन कला को नई पीढ़ी तक प्रामाणिक रूप से पहुँचाना है। आज के आधुनिक युग में जहाँ पारंपरिक वाद्य यंत्रों का चलन कम हो रहा है, वहीं यह कार्यशाला युवा कलाकारों को पेशेवर प्रशिक्षण और एक सम्मानजनक मंच प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। सारंगी हरियाणवी लोक संस्कृति की एक ऐसी अनमोल धरोहर है, जिसके संरक्षण और संवर्धन के लिए ज़मीनी स्तर पर ऐसे आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हैं। इसके लिए हरियाणा कला परिषद का प्रयास सराहनीय है। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों द्वारा सांरगी वादन कर अपनी प्रतिभा को दिखाया गया। महेश जोशी ने सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया। कार्यशाला में 7 साल से 17 साल के प्रतिभागियों ने अपना हुनर दिखाया। इस मौके पर राजन जोगी, नरेश कुंडू, बलबीर, सत्यवान, रामभज, देवीराम, रामफल, राजकुमार, सत्य जोगी, सुलतान आदि उपस्थित रहे।