सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत संस्कृति संचालनालय, भोपाल एवं शासकीय संगीत महाविद्यालय, धार के संयुक्त तत्वावधान में 19 सितंबर को पं. विष्णु नारायण भातखंडे स्मृति संगीत प्रसंग का आयोजन शासकीय ललित कला महाविद्यालय, धार के सभागार में किया गया। कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा की मनोहारी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्री जयंत जोशी, विशिष्ट अतिथि श्री लक्ष्मीकांत जोशी, विशेष अतिथि भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष श्री निलेश भारती, श्री जसप्रीत डंग, जनभागीदारी अध्यक्ष श्री दीपक खलतकर एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतीश रतोनिया ने पं. विष्णु नारायण भातखंडे के चित्र पर माल्यार्पण, सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्वलन कर किया। इसके पश्चात महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। सभी अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान प्राचार्य डॉ. सतीश रतोनिया द्वारा शाल एवं श्रीफल भेंट कर किया गया। स्वागत उद्बोधन डॉ. देशराज वशिष्ठ ने दिया।
*डॉ. अरुण धर्माधिकारी के शास्त्रीय गायन ने बांधा समां*
संगीत प्रसंग की मुख्य प्रस्तुतियों का शुभारंभ ग्वालियर से आमंत्रित शास्त्रीय गायक डॉ. अरुण धर्माधिकारी के गायन से हुआ। उन्होंने विलंबित एकताल में राग केदार की रचना “बहुत गई, थोड़ी रह गई इस जग में” को सधे हुए सुर एवं लय के साथ प्रस्तुत किया। इसके बाद मध्यलय तीनताल में राग केदार की प्रचलित रचना “कान्हा रे नंद नंदन” ने श्रोताओं का मन मोह लिया।
इसके पश्चात पं. विशाल कशालकर की रचना “लागी लागी प्रीत अब तुमसे कैसे कटे” प्रस्तुत की गई। राग मालकौंस में “पिया संग लरी पछतानी रे”, राग सोहनी एवं खमाज में ठुमरी तथा तराना की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को शास्त्रीय संगीत की विविध रंगतों से परिचित कराया। गायन की अंतिम प्रस्तुति “बाजे रे मुरलिया बाजे” भजन की रही।
गायन में तबले पर श्री पवन माहोर, हारमोनियम पर डॉ. देशराज वशिष्ठ, वायलिन पर श्री राघव वशिष्ठ तथा तानपुरे पर सुश्री कोशी राठौर एवं सुश्री यशस्विनी मुरमकर ने प्रभावी संगत की।
*मनोज बावरा के सितार वादन ने मोहा मन*
कार्यक्रम की अगली मुख्य प्रस्तुति इंदौर के युवा सितार वादक श्री मनोज बावरा की रही। उन्होंने सितार वादन का आरंभ राग यमन के आलाप से किया। इसके पश्चात झपताल में मध्यलय की गत प्रस्तुत की गई। द्रुत लय में जोड़ एवं झाला की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। श्रोताओं ने तालियों से कलाकार का उत्साहवर्धन किया।
इसके बाद मिश्र राग में “एकला चलो रे” की धुन ने श्रोताओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। सितार वादन की अंतिम प्रस्तुति राग भैरवी की गत से हुई। प्रस्तुति के समापन पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कलाकारों ने श्रोताओं का अभिवादन स्वीकार किया। सितार वादन में तबले पर श्री यशपाल बावरा ने संगत की।
कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों के साथ दोनों महाविद्यालयों के विद्यार्थी एवं संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्री प्रेम सिंह सिकरवार, श्री भूपेंद्र सिंह चौहान, श्री दुर्गेश बिरथरे, श्री सौमत सिंह चिढ़ार, श्री शशि चौधरी, श्री रवीन्द्र डोडवे, श्री पीयूष शर्मा, श्री उदय राव कडूसकर, श्री गोपाल, श्री गिरधारी सहित महाविद्यालय का स्टाफ उपस्थित रहा।
कार्यक्रम का संचालन सुश्री प्रिया शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतीश रतोनिया ने किया।
पं. विष्णु नारायण भातखंडे की स्मृति को समर्पित इस आयोजन ने विद्यार्थियों, संगीत साधकों एवं संगीत प्रेमियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की विविध शैलियों एवं प्रस्तुतियों से रूबरू कराने के साथ ही संगीत शिक्षा और साधना के लिए अनुकूल वातावरण को और समृद्ध किया।
#SevaSankalpAbhiyan #सेवा_संकल्प_अभियान
Jansampark Madhya Pradesh
9 views | Dhar, Madhya Pradesh | Sep 20, 2026