मनावर तहसील के ग्राम सिरसाला निवासी 23 वर्षीय युवा उद्यमी श्री आर्यन पाटीदार ने मेहनत, अनुभव और सही अवसर का लाभ उठाकर खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। किसान परिवार से आने वाले श्री पाटीदार ने कृषि पर निर्भरता से आगे बढ़ते हुए स्वयं का व्यवसाय स्थापित किया। आज उनका उद्यम न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है, बल्कि 6 से 7 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी उपलब्ध करा रहा है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) ने उनके इस सफर को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
*MBA की पढ़ाई से व्यवसाय तक का सफर*
श्री आर्यन पाटीदार ने इंदौर के बीएम कॉलेज से MBA की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सीधे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने के बजाय पहले खाद्य उत्पादों की री-पैकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में लगभग 2 से 3 वर्षों तक काम किया। खुले में उपलब्ध उत्पादों को पैक कर अपने ब्रांड के माध्यम से बाजार तक पहुंचाने के दौरान उन्होंने बाजार की मांग, ग्राहकों की पसंद और वितरण व्यवस्था को करीब से समझा।
धीरे-धीरे उनका बाजार मजबूत हुआ और अपने उत्पादों के लिए उन्होंने एक स्थापित ग्राहक आधार एवं डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क तैयार किया। इस अनुभव ने उन्हें अपनी स्वयं की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने का आत्मविश्वास दिया। इसके बाद उन्होंने केवल पैकिंग तक सीमित रहने के बजाय स्वयं उत्पादन करने का निर्णय लिया।
*एक पोस्टर से मिली योजना की जानकारी, विभागीय मार्गदर्शन से बढ़े कदम*
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने के लिए पूंजी की आवश्यकता थी। इसी दौरान धार स्थित उद्यानिकी विभाग में लगे पोस्टर के माध्यम से उन्हें प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) की जानकारी मिली। उन्होंने विभाग से संपर्क किया, जहां अधिकारियों द्वारा योजना, पात्रता और ऋण-अनुदान की प्रक्रिया के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया।
योजना और बैंक सहयोग से आवश्यक वित्तीय सहायता प्राप्त करने के बाद श्री पाटीदार ने सितंबर 2025 में अपनी मैन्युफैक्चरिंग इकाई की स्थापना की। इस प्रकार वर्षों के अनुभव और अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के संकल्प को उन्होंने स्वयं के उत्पादन केंद्र के रूप में साकार किया।
*₹11.49 लाख की इकाई, ₹4.01 लाख की अनुदान सहायता*
श्री पाटीदार की इकाई की कुल इकाई लागत ₹11.49 लाख रही। PMFME योजना के अंतर्गत उन्हें परियोजना लागत का 35 प्रतिशत अर्थात ₹4.01 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उन्होंने आधुनिक मशीनरी एवं आवश्यक उपकरण स्थापित किए और अपनी उत्पादन प्रक्रिया को व्यवस्थित एवं बेहतर बनाया।
इकाई में उत्पादों की गुणवत्ता, स्वच्छता, पैकेजिंग और उत्पादन प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योजना से मिले सहयोग ने उनके लिए व्यवसाय को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने का अवसर उपलब्ध कराया।
*स्थानीय स्तर से शुरू हुआ कारोबार, जिले।के विभिन्न स्थानों तक पहुंचा बाजार*
श्री पाटीदार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल का उपयोग कर परमल एवं मुरमुरा तैयार कर रहे हैं। बेहतर गुणवत्ता और आकर्षक पैकेजिंग के माध्यम से उन्होंने अपने उत्पादों के लिए बाजार तैयार किया है। वर्तमान में वे जिले के विभिन्न स्थानों में डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क के माध्यम से अपने उत्पाद पहुंचा रहे हैं।
व्यवसाय को और विस्तार देने के लिए वे अपनी इकाई को पूरी तरह ऑटोमैटिक प्लांट में परिवर्तित करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे आने वाले 2 माह में पूरी तरह ऑटोमैटिक प्लांट स्थापित करेंगे उनका लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ बाजार का विस्तार करना है।
*व्यवसाय ने बदली आर्थिक स्थिति, 6–7 लोगों को मिला रोजगार*
उद्यम स्थापित होने के बाद श्री पाटीदार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। व्यवसाय से वर्तमान में उन्हें लगभग ₹7 से ₹8 लाख वार्षिक लाभ प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही उनकी इकाई स्थानीय युवाओं एवं श्रमिकों के लिए रोजगार का माध्यम बनी है और 6 से 7 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध करा रही है।
इस तरह श्री पाटीदार की सफलता केवल उनके व्यक्तिगत आर्थिक सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका उद्यम स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का भी माध्यम बन रहा है।
*‘सही अवसर मिले तो युवा खुद बना सकते हैं अपना भविष्य’*
श्री आर्यन पाटीदार का कहना है कि युवाओं को नौकरी की तलाश के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि मेहनत और लगन के साथ शासन की योजनाओं की जानकारी लेकर उनका सही उपयोग किया जाए, तो छोटे स्तर से शुरू किया गया व्यवसाय भी आगे चलकर रोजगार देने वाला उद्यम बन सकता है।
*योजना का सहयोग और मेहनत का संकल्प बना सफलता की पहचान*
श्री आर्यन पाटीदार की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही योजना की जानकारी, विभागीय मार्गदर्शन, बैंक सहयोग और स्वयं की मेहनत मिलकर किसी भी उद्यम को नई दिशा दे सकते हैं। कृषि परिवार से निकलकर MBA की पढ़ाई, फिर री-पैकिंग और मार्केटिंग का अनुभव तथा अंततः अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने तक का उनका सफर निरंतर सीखने और आगे बढ़ने की कहानी है।
23 वर्षीय आर्यन की यह कहानी बताती है कि युवा उम्र अवसरों की तलाश करने और उन्हें सफलता में बदलने का समय है। PMFME योजना से मिले सहयोग को अवसर में बदलकर श्री पाटीदार ने अपने लिए आर्थिक मजबूती का रास्ता तैयार किया और साथ ही दूसरों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित किए। उनका यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्र के उन युवाओं के लिए प्रेरणादायी है, जो अपने स्थानीय संसाधनों और हुनर को व्यवसाय में बदलकर आत्मनिर्भर बनने का सपना देखते हैं।
Jansampark Madhya Pradesh
62 views | Dhar, Madhya Pradesh | Sep 19, 2026