हरिशेवा उदासीन आश्रम में आध्यात्मिक त्रिवेणी का अनुपम संगम
-भगवान श्रीकृष्ण को श्रद्धाभाव से अर्पित किया छप्पन भोग
-भगवान की लीलाओं में जीवों के कल्याण की भावना निहित - स्वामी अशोकानंद जी महाराज
भीलवाड़ा:राजकुमार गोयल, 5 जून
सनातन सेवा समिति, हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर एवं महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के सानिध्य में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस कथाव्यास पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज (जबलपुर) ने भगवान श्रीकृष्ण के अवतरण, गोकुल आगमन एवं उनकी मनोहारी बाल लीलाओं का अत्यंत रसपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे तथा पूरा आश्रम कृष्णमय वातावरण में सराबोर रहा।
स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने पूतना उद्धार, शकटासुर वध, तृणावर्त संहार, माखन चोरी, ऊखल बंधन तथा यमलार्जुन मोक्ष जैसे प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान की प्रत्येक लीला में जीवों के कल्याण का संदेश निहित है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने बाल्यावस्था में ही असुरों का विनाश कर धर्म की स्थापना तथा भक्तों की रक्षा का संदेश दिया। उनकी बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, प्रेम, करुणा और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। कथा के दौरान उन्होंने श्रीमद्भागवत का प्रसिद्ध श्लोक सुनाते हुए कहा- “कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्।” अर्थात समस्त अवतारों में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं।
उन्होंने भगवान की करुणा का वर्णन करते हुए कहा-
“श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्। अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम्॥”
अर्थात भगवान विष्णु का श्रवण, कीर्तन, स्मरण, चरण सेवा, अर्चन, वंदन, दास्य भाव, सख्य भाव एवं आत्मसमर्पण भक्ति के नौ प्रमुख स्वरूप हैं, जिनके माध्यम से मनुष्य परमात्मा को प्राप्त कर सकता है।
स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने कहा कि पुरुषोत्तम मास आत्मचिंतन, साधना, दान, जप, तप एवं सत्संग का विशेष अवसर है। इस पावन काल में भगवान के नाम का स्मरण करने से अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख, शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
कथा उपरांत भगवान श्रीकृष्ण को श्रद्धा एवं भक्ति भाव से छप्पन भोग अर्पित किया गया। मंदिर परिसर में आकर्षक रूप से सजाए गए छप्पन भोग में विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्न, फल, मेवा, पेय पदार्थ एवं पारंपरिक व्यंजन भगवान को समर्पित किए गए। छप्पन भोग के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रही। भक्तों ने भगवान के जयकारों एवं भजनों के मध्य महाआरती में भाग लिया तथा प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर आश्रम परिसर भक्तिमय उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। आज आयोजित विष्णु यज्ञ में गोविन्दलाल-मंजू देवी गोहिल तथा विजय कुमार-नीलू गोहिल ने जोड़े सहित आहुतियां अर्पित की तथा भगवान महादेव का रुद्राभिषेक किया। आश्रम के संत मायाराम एवं संत गोविन्दराम ने श्रद्धालुओं से पुरुषोत्तम मास के दौरान भीलवाड़ा में प्रवाहित हो रही धर्म, भक्ति एवं सत्संग की त्रिवेणी का अधिकाधिक लाभ लेने का आह्वान किया।
इस अवसर पर संत राजाराम, संत ईशानराम, संत सुयज्ञराम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। कथा के समापन पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।