बाल रंग उत्सव में ‘महारानी लक्ष्मीबाई’ नाटक की प्रभावशाली प्रस्तुति
उदयपुर, 26 सितंबर। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बाल रंग उत्सव के अंतर्गत आज शिल्पग्राम स्थित दर्पण सभागार में ‘शिक्षा में रंगमंच’ कार्यशाला के प्रतिभागी बच्चों द्वारा ‘महारानी लक्ष्मीबाई’ नाटक की सफल प्रस्तुति दी गई।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि नाटक सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता ‘झाँसी की रानी’ तथा पाठ्यक्रम आधारित नाट्य सामग्री से प्रेरित था। प्रस्तुति में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के साहस, देशभक्ति, संघर्ष और बलिदान को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया गया।
इस प्रस्तुति की विशेषता बुंदेलखंड की पारंपरिक लोकनाट्य ‘स्वांग’ शैली रही। बुंदेलखंडी लोकगीत, लोकधुनों, पारंपरिक वाद्यों तथा युद्ध के ध्वनि प्रभावों के माध्यम से बच्चों ने मंच पर लोक संस्कृति और ऐतिहासिक परिवेश को जीवंत किया। अभिनय, संवाद, संगीत, सामूहिक नृत्य और शारीरिक अभिव्यक्ति के सुंदर संयोजन ने दर्शकों को प्रभावित किया।
नाटक में लक्ष्मीबाई की सहेलियों जूही और मुंदर, सेनापति रघुनाथ राव, स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे, सरदार रामचंद्र तथा अंग्रेज सैनिकों के पात्रों के माध्यम से संघर्ष की विभिन्न परिस्थितियों को प्रस्तुत किया गया। नाटक का संदेश रहा कि देश की स्वतंत्रता अनेक वीरों के त्याग, साहस और बलिदान की नींव पर खड़ी है। नाटक का लेखन एवं निर्देशन डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने किया। सह निर्देशन अमन व्यास एवं योगिता ने किया। बैकस्टेज की जिम्मेदारी ऋषि मौर्य, राज श्रीवास्तव एवं अनिल प्रजापति ने संभाली, जबकि संगीत टीम में शौर्य सेन, पार्थ उपाध्याय, रामम् एवं ऋषि मौर्य शामिल रहे। विद्यालय प्रतिनिधि बबीता सेंगर रहीं। कार्यक्रम में एम.डी. एकेडमी, महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय एवं गुरु नानक स्कूल, सेक्टर-4 के विद्यार्थी उपस्थित रहे और बाल कलाकारों द्वारा नाट्य प्रस्तुति का आनंद लेते हुए कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
बाल रंग उत्सव की प्रस्तुतियों का सिलसिला 27 सितंबर को भी जारी रहेगा। कल ‘युगधारा’ और ‘अहिल्याबाई’ नाटकों की प्रस्तुतियां दर्पण सभागार, शिल्पग्राम में होंगी।