मगध मेडिकल अस्पताल में DM का बड़ा एक्शन: मगध मेडिकल में हंगामे के बाद DM का ‘ऑपरेशन सुधार’, 6 मैनेजरों का वेतन बंद; 10 दिन में व्यवस्था दुरुस्त करने का अल्टीमेटम
गया: मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मरीजों के परिजनों और सुरक्षा गार्डों के बीच लगातार हो रही हाथापाई की घटनाओं के बाद जिला प्रशासन अब सख्त एक्शन मोड में आ गया है। मंगलवार को नवजात बच्चे की तबीयत जानने के लिए डॉक्टर से मिलने अस्पताल के अंदर जाने को लेकर एक मरीज के परिजन और गार्ड के बीच विवाद हुआ था। देखते ही देखते मामला हाथापाई और मारपीट तक पहुंच गया। इस घटना के अगले ही दिन बुधवार को जिलाधिकारी शशांक शुभंकर खुद मगध मेडिकल अस्पताल पहुंचे और पूरे अस्पताल की व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मिली खामियों पर डीएम ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
डीएम ने अस्पताल परिसर से लेकर विभिन्न वार्डों तक साफ-सफाई, जलजमाव, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सकीय सुविधाओं, दवाओं की उपलब्धता, मरीजों को मिलने वाले भोजन, डॉक्टरों की उपस्थिति और अन्य मूलभूत व्यवस्थाओं की बारीकी से जांच की। साफ-सफाई की स्थिति अपेक्षित स्तर की नहीं मिलने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद अस्पताल में कार्यरत सभी छह हॉस्पिटल मैनेजर एवं हेल्थ मैनेजर से स्पष्टीकरण मांगने तथा तत्काल प्रभाव से उनका वेतन बंद करने का निर्देश दिया।
डीएम ने साफ शब्दों में कहा कि अस्पताल की व्यवस्था में 10 दिनों के भीतर अपेक्षित सुधार दिखना चाहिए। यदि तय समय में स्थिति नहीं सुधरी तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाएगी।
प्रवेश द्वार पर जलजमाव, 7 दिन में दूर होंगी कमियां
निरीक्षण के दौरान अस्पताल भवन के प्रवेश द्वार पर बारिश का पानी जमा मिला। डीएम ने तत्काल जल निकासी कराने और प्रवेश द्वार के आसपास पेवर ब्लॉक लगाने का निर्देश बीएमएसआईसीएल की एजेंसी को दिया। अस्पताल परिसर में जलजमाव वाले सभी स्थानों को चिन्हित कर स्थायी समाधान करने को कहा गया। इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड में खराब पंखे और एयर कंडीशनर तथा एमसीएच वार्ड में खराब AC समेत अन्य तकनीकी कमियों को भी तत्काल दुरुस्त करने का आदेश दिया गया। ब्लैक स्पॉट वाले स्थानों पर अतिरिक्त रोशनी लगाने और चिन्हित सभी कमियों को सात दिनों के अंदर दूर करने का निर्देश दिया गया।
निजी एंबुलेंस पर ‘नो एंट्री’ अस्पताल परिसर में निजी
एंबुलेंस खड़ी मिलने पर डीएम ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में निजी एंबुलेंस को अस्पताल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाए। एसडीओ सदर और पुलिस उपाधीक्षक नगर को तत्काल विशेष अभियान चलाकर परिसर में खड़ी निजी एंबुलेंस को बाहर कराने और नियम के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया।
मरीजों को बाहर से दवा खरीदने की मजबूरी नहीं
नवजात शिशु ओपीडी का निरीक्षण करते हुए डीएम ने डॉक्टरों द्वारा लिखी जा रही दवाओं और अस्पताल में उपलब्ध दवाओं की जानकारी ली। उन्होंने यह भी जाना कि मरीजों को किन दवाओं के लिए बाहर जाना पड़ रहा है। अस्पताल अधीक्षक को निर्देश दिया गया कि सभी आवश्यक बेसिक दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर से दवा न खरीदनी पड़े।
रोज बदलेगी बेडशीट, कलर कोड का होगा पालन
वार्डों में बेडशीट की व्यवस्था की समीक्षा करते हुए डीएम ने राज्य सरकार के निर्देश के मुताबिक प्रतिदिन निर्धारित कलर कोड के अनुसार बेडशीट बदलने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि सफाई की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। गंदगी मिलने पर संबंधित सफाई एजेंसी पर पेनल्टी की कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने विभिन्न वार्डों के शौचालयों का भी स्वयं निरीक्षण किया। कई जगह सफाई संतोषजनक नहीं मिलने पर तत्काल सुधार के निर्देश दिए और सुलभ सफाई एजेंसी को नियमित एवं बेहतर सफाई सुनिश्चित करने को कहा।
रात में डॉक्टरों की ड्यूटी पर होगी खास निगरानी
डीएम ने निर्देश दिया कि अस्पताल का डॉक्टर रोस्टर सभी प्रमुख और सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित किया जाए। खासकर रात की ड्यूटी में डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अधीक्षक और उपाधीक्षक को हर रात औचक निरीक्षण कर डॉक्टरों की उपस्थिति जांचने और इसकी रिपोर्ट प्रतिदिन डीएम को देने का निर्देश दिया गया।
24 घंटे में भोजन की गुणवत्ता सुधारने का आदेश
मरीजों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता की भी जांच की गई। डीएम ने भोजन की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता बताते हुए अस्पताल अधीक्षक को अगले 24 घंटे में व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया। डीएम शशांक शुभंकर ने कहा कि मगध मेडिकल अस्पताल में दूर-दराज से बड़ी संख्या में मरीज इलाज कराने आते हैं। ऐसे में साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों की उपस्थिति, भोजन, पेयजल, शौचालय, प्रकाश और अन्य मूलभूत सुविधाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों को मरीजों के प्रति पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करने का निर्देश दिया।