*शेर की आँख में कीड़ा, चिड़िया बनी इलाज*
सह-अस्तित्व का सबसे खूबसूरत सबक
बड़ा होने का मतलब ताकतवर होना नहीं
जब शेर को भी छोटी चिड़िया की जरूरत पड़ी
शेर जंगल का शाहंशाह है। चिडि़या जहान का संगीत
जियो और जीने दो, झंझट मत किया करो
उसकी आँख के अंदर अचानक एक कीड़ा घुस गया। आँख सूज गयी, दर्द और बेहाली का आलम यह कि आँख खुल नहीं पा रही थी।
तभी एक चिड़िया आयी। उसने शेर की आँख खोली और अपनी चोंच से उस कीड़े को खींचकर बाहर निकाल दिया। फिर कीड़े को खा लिया और अपने काम से फुर्र हो गयी।
लेकिन असली हैरानी तो यह रही कि शेर ने न अपने कष्ट पर चिल्ल-पों की, न चिड़िया ने उसकी आँख पर चोंच मारने की कोई एप्लिकेशन दी, न शेर ने डरकर अपनी आँख मिचमिचायी और न दहाड़ लगायी। वह तसल्ली से लेटा रहा और चिड़िया अपना काम करती रही।
जाते समय न शेर ने उसका शुक्रिया अदा किया और न चिड़िया ने शेर पर कोई अहसान जताया। न शेर ने उस चिड़िया को अपना निवाला बनाया और न ही उस चिड़िया ने शेर कि आँख कि पुतली पर निशाना साध कर चोंच मारी।
इसी संबंध को सह-अस्तित्व कहते हैं। तुम अपना काम करो, हम अपना काम करते रहें। न तुम मेरे काम में दखल दो, न हम तुम्हें परेशान करें। जियो और जीने दो। न मैं तुम्हारे धर्म स्थल पर गन्दा करो और न मैं तुम्हारी गाँव में बल्लम घुसेडूं।
हाँ, एक-दूसरे के काम और वक्त पर काम आते रहो। इसलिए नहीं कि कोई बड़ा है और कोई छोटा, बल्कि इसलिए कि इस दुनिया में हर जीव किसी न किसी रूप में जरूरी है। छोटा होने का मतलब गैरजरूरी होना नहीं है। सह-अस्तित्व में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता।
तुम आज शेर हो। समाज और देश का संचालन कर रहे हो। तुम्हारे पास ताकत है, अधिकार है, सत्ता है। तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम छोटे और कमजोर जीवों पर अत्याचार करते रहो। और अगर करते ही रहोगे, तो यकीन मान लेना कि फिर तुम्हारी आँख में घुसे उस कीड़े और उससे पैदा हुई विह्वल पीड़ा का निदान करने वाला तुम्हें कोई नहीं मिलेगा।
तो भइया, किस्सा खत्म हो गया। पंजीरी-पंचामृत बाँटने की जरूरत नहीं। चलो, अपने-अपने काम में जुट जाओ। बंदगी करो। आपस में सियाराम बोलो या सलाम करो।
*झंझट मत किया करो। वरना फना हो जाओगे, जैसे डायनोसर।* 🙏