।समाहरणालय पूर्णिया।।
(जिला जनसंपर्क कार्यालय)
प्रेस विज्ञप्ति:-710,
दिनांक : 03 जून 2026,
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ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि संरक्षण कार्यक्रम के तहत हरिपुर (अमौर) में ऐतिहासिक पांडुलिपियों का अवलोकन
भारत सरकार के अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि संरक्षण मिशन के अंतर्गत बुधवार को पूर्णिया जिले के अमौर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक ग्राम हरिपुर का भ्रमण जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री पंकज कुमार पटेल के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर पुराने अरबी फारसी एवं उर्दू पांडुलिपियों का अनुवाद एवं व्याख्या करने हेतु उर्दू अनुवादक श्री वसीम अहमद अलीमी एवं सहायक उर्दू अनुवादक श्री अब्दुल गनी भी प्रशासनिक सदस्य के रूप में उपस्थित रहे।
हरिपुर पहुंचने पर सीमांचल के प्रसिद्ध शोधकर्ता एवं साहित्यकार मौलाना रिजवान नदवी तथा काजी परिवार के गणमान्य सदस्यों द्वारा प्रशासनिक दल का भव्य एवं आत्मीय स्वागत किया गया। इस अवसर पर काजी परिवार द्वारा लगभग एक सौ वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों, दस्तावेजों एवं ऐतिहासिक पत्रों को अवलोकनार्थ प्रस्तुत किया गया।
अवलोकन के क्रम में प्रसिद्ध फारसी एवं उर्दू शायर काजी नज्म हरिपुरी की हस्तलिखित रचनाएँ, काव्य-पांडुलिपियाँ तथा विभिन्न ऐतिहासिक पत्र प्रस्तुत किए गए। साथ ही काजी परिवार के इतिहास से संबंधित बहुमूल्य दस्तावेजों एवं पत्रों का भी प्रदर्शन किया गया, जिनसे हरिपुर तथा प्राचीन पूर्णिया के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त होती हैं।
इस अवसर पर मौलाना रिजवान नदवी ने काजी परिवार के इतिहास, उनकी साहित्यिक परंपरा तथा सदियों से कला, संस्कृति और ज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उल्लेखनीय है कि हरिपुर का काजी परिवार मुगल काल से लेकर वर्तमान समय तक साहित्य, कला, संस्कृति एवं सामाजिक नेतृत्व की गौरवशाली परंपरा का संवाहक रहा है। यह क्षेत्र प्रसिद्ध ग्रंथ "आईना-ए-पूर्णिया" के लेखक के कारण भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। प्रस्तुत फारसी एवं उर्दू पांडुलिपियाँ, पत्र एवं काव्य-संग्रह विभाजन-पूर्व पूर्णिया के इतिहास, सामाजिक जीवन, सांस्कृतिक परिवेश तथा उस दौर की बौद्धिक परंपराओं की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री पंकज कुमार पटेल ने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन का उद्देश्य देश की प्राचीन ज्ञान-परंपरा एवं बौद्धिक विरासत का संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं व्यापक प्रसार सुनिश्चित करना है। ऐसे ऐतिहासिक दस्तावेज और पांडुलिपियाँ हमारी साझा सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। वहां प्राप्त सभी पांडुलिपियों को ज्ञान भारतम पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया
भ्रमण के दौरान काजी परिवार के अनेक सदस्य एवं स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे तथा उन्होंने पांडुलिपियों एवं ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण हेतु प्रशासनिक पहल का स्वागत किया।
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Purnia, Bihar | Jun 3, 2026