#बालाघाट
खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती एवं डीएसआर तकनीक की दी गई जानकारी
लांजी विकासखंड के विभिन्न ग्रामों में आयोजित हुई कृषक चौपाल,
पराली प्रबंधन और हरी खाद के उपयोग पर दिया गया प्रशिक्षण
कृषि विभाग द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण एवं आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करने के लिए विकासखंड लांजी के विभिन्न ग्रामों में कृषक चौपाल एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि अभियान के अंतर्गत किसानों को डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक, पराली प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती के विभिन्न उपायों की जानकारी दी जा रही है।
अभियान के तहत ग्राम कालीमाटी में कृषकों को प्राकृतिक खेती के अंतर्गत जैविक कीटनाशक नीमास्त्र तैयार करने एवं उसके उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही डीएसआर पद्धति से धान की बुवाई करने की विधि एवं इसके लाभों के बारे में विस्तार से बताया गया। किसानों को समझाया गया कि यह तकनीक श्रम, समय एवं सिंचाई जल की बचत करते हुए खेती की लागत कम करने में सहायक है।
इसी क्रम में ग्राम पंचायत पानगांव में आयोजित कृषक चौपाल में ग्राम पंचायत सचिव एवं पंचायत सहायक की उपस्थिति में किसानों को पराली प्रबंधन के महत्व से अवगत कराया गया। किसानों को डीएसआर खेती तकनीक के लाभ, ई-टोकन के माध्यम से खाद वितरण व्यवस्था तथा कृषि विभाग के कार्यालयों में उपलब्ध खरीफ फसलों के प्रमाणित बीजों की जानकारी प्रदान की गई।
वहीं ग्राम पंचायत झालीवाड़ा में आयोजित कार्यक्रम में 18 कृषकों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों को डीएसआर विधि से धान की खेती, सुपर सीडर एवं सीड ड्रिल मशीनों के उपयोग, हरी खाद के महत्व, नरवाई प्रबंधन तथा उर्वरकों के संतुलित उपयोग के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। किसानों को ढैंचा एवं सनई जैसी हरी खाद वाली फसलों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपाय बताए गए।
कार्यक्रम में कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) योजना के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। साथ ही किसानों को एसएडीओ कार्यालय में उपलब्ध धान एवं अरहर बीजों की कीमत, अवधि, उम्र तथा उपलब्धता संबंधी जानकारी देकर प्रमाणित बीजों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।
उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत में कमी आएगी, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा किसानों की आय में वृद्धि होगी। कृषि विभाग द्वारा जिले के विभिन्न गांवों में इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं।
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