मऊ- आजादी के अमृत काल में महीनेभर से “नाली में बह रहा ‘अमृत’, सो रहा सिस्टम!”
ग्रीन स्ट्रीट इमलिया में जल निगम की पाइपलाइन फटी, लाखों लीटर पेयजल बर्बाद, शिकायतों के बाद भी अफसरों के कान पर जूं नहीं रेंगी
मऊ, शहर के पॉश और सबसे व्यस्त इलाकों में शुमार ग्रीन स्ट्रीट इमलिया मोहल्ले में जल निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां नाली के बीच से होकर गुजर रही पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइन में करीब एक महीने से लीकेज है और स्वच्छ पानी लगातार नाली में बह रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग शायद किसी बड़े हादसे या जनाक्रोश का इंतजार कर रहा है। सूचना और शिकायत के बावजूद लीकेज बंद नहीं कराया गया। नतीजा यह कि रोजाना हजारों लीटर पीने वाला पानी बर्बाद होकर नाले की भेंट चढ़ रहा है।
जिस पानी की एक-एक बूंद बचाने की अपील की जाती है, वही पानी जिम्मेदारों की आंखों के सामने नाली में बह रहा है। करीब एक महीने में लाखों लीटर स्वच्छ पेयजल बर्बाद होने के बावजूद जिम्मेदारों की चुप्पी व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर कर रही है। सवाल यह भी है कि जब शहर के प्रमुख मोहल्ले में पाइपलाइन का लीकेज इतने लंबे समय तक दुरुस्त नहीं हो पा रहा है तो आम नागरिकों की पेयजल समस्याओं का क्या हाल होगा?
नाली के बीच पाइपलाइन, फिर भी स्वास्थ्य सुरक्षा रामभरोसे
मामला सिर्फ पीने के पानी की बर्बादी तक सीमित नहीं है। जिस पाइपलाइन में लीकेज है, वह नाली के बीच से होकर गुजर रही है। ऐसे में पाइप में दबाव कम होने की स्थिति में नाली का दूषित पानी पेयजल पाइपलाइन के भीतर जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा हुआ तो घरों तक पहुंचने वाला पानी लोगों की सेहत के लिए खतरा बन सकता है।
लोगों की खाने की थाली और पीने के पानी गिलास तक पहुंचने वाले स्वच्छ जल की सुरक्षा का जिम्मा आखिर किसका है? क्या किसी बीमारी या संक्रमण के फैलने के बाद ही विभाग की नींद टूटेगी? यह सवाल अब स्थानीय लोगों को परेशान कर रहा है।
नगर पालिका से जल निगम तक शिकायत, फिर भी ‘सिस्टम’ मौन
स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने समस्या की जानकारी नगर पालिका, जल निगम और वार्ड के सभासद तक को दी, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक कुछ नहीं हुआ। शिकायतें जिम्मेदारों तक पहुंचती रहीं और पानी नाली में बहता रहा।
विडंबना यह है कि एक ओर जल संरक्षण और स्वच्छ पेयजल को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी फटे पाइपलाइन से बह रहा पानी सरकारी तंत्र की लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है। स्थानीय लोगों ने तत्काल लीकेज बंद कराने, पाइपलाइन की जांच कराने और पेयजल की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।