मऊ- बड़ा गड़बड़ झाला, बिना शासनादेश भर्ती पर गिरेगी गाज! स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर महानिदेशालय की नजर
मऊ, आजमगढ़ और बलिया समेत कई जिलों में आउटसोर्स कार्मिकों की संख्या और मानदेय में मिली गड़बड़ी - बजट रोकने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी
मऊ, स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कार्मिकों की भर्ती को लेकर महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के कार्यालय ने जिलों के विभागीय अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 10 सितंबर 2026 को जारी पत्र में आजमगढ़ मंडल के मऊ और बलिया समेत संबंधित जिलों में बिना शासनादेश तथा महानिदेशालय की सहमति के मनमाने ढंग से आउटसोर्स कार्मिक रखे जाने के मामलों पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों को दरकिनार कर की जा रही ऐसी नियुक्तियां नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आती हैं। साथ ही दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई और संबंधित बजट रोकने की चेतावनी दी गई है।
पूर्व में वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी शासनादेश का पालन नहीं किया गया। इस वजह से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अनुदान संख्या-32 के अंतर्गत मानक मद-58 ‘आउटसोर्स सेवाओं’ में प्रदेश के सभी जनपदों के आहरण-वितरण अधिकारियों से सूचना (शासनादेश) मांगी गई थी। लेकिन विभाग को अपूर्ण सूचना उपलब्ध कराया गया, इसलिए निदेशालय द्वारा 'गूगल शीट' पर ही उपलब्ध कराई गई सूचनाओं का हवाला दिया गया है। इन सूचनाओं के परीक्षण में कई जिलों में तैनात आउटसोर्स कार्मिकों की संख्या और विभाग द्वारा शासनादेश का अनुपालन न करने की बात सामने आने की बात कही गई है।
कहीं जरूरत से ज्यादा कार्मिक, तो कहीं स्वीकृति पर सवाल
महानिदेशालय के पत्र के मुताबिक कुछ जनपदों में आउटसोर्स कार्मिकों की संख्या अत्यधिक परिलक्षित हो रही है। ऐसे में इन कार्मिकों को रखे जाने का औचित्य और आधार स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किए जाने की जरूरत बताई गई है कि इन कार्मिकों की नियुक्ति की स्वीकृति आखिर किस स्तर से और किस आधार पर प्राप्त हुई।
महानिदेशालय ने जिलों से उपलब्ध कराई गई सूचना को आगामी बजट आवंटन का आधार बनाने की बात कही है। यानी अब जिलों में तैनात आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या और उनके मानदेय का सीधा असर आगामी बजट पर पड़ सकता है।
बढ़ानी होगी संख्या तो पहले लेनी होगी मंजूरी पूर्व में कोई नियमों का पालन नहीं किया गया, इस वजह से
पत्र में साफ निर्देश दिया गया है कि भविष्य में यदि किसी जनपद को आउटसोर्स कार्मिकों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता महसूस होती है तो बढ़ोतरी से पहले महानिदेशालय स्तर से अनुमति अथवा स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति अतिरिक्त कार्मिक रखने की स्थिति में उनके मानदेय के भुगतान के लिए बजट आवंटित नहीं किया जाएगा।
महानिदेशालय ने इसके लिए संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी को पूर्ण रूप से उत्तरदायी ठहराने की बात कही है। ऐसे में पत्र जारी होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के जिलास्तरीय अधिकारियों में खलबली मचना तय माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि मऊ, आजमगढ़ और बलिया समेत समस्त जिलों में आउटसोर्स कार्मिकों की संख्या, नियुक्ति प्रक्रिया में प्रयोग शासनादेश और बजट संबंधी सूचनाओं के मिलान के बाद विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई सामने आती है?