घर डूबे, रास्ते डूबे… हौसले नहीं डूबे: स्वास्थ्य टीम ने बाढ़ में बचाई कई जिंदगियां
• जलमग्न घरों से गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों का रेस्क्यू
• तीन महिलाओं का कराया सुरक्षित प्रसव
• जब चारों तरफ था पानी, तब स्वास्थ्यकर्मी बने सहारा
छपरा। चारों तरफ पानी ही पानी। घरों के दरवाजे तक पहुंच चुका सैलाब और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं। कहीं गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से जूझ रही थी तो कहीं पांच फीट पानी से घिरे घर में अकेली वृद्ध महिला जिंदगी और मौत के बीच फंसी थी। ऐसे वक्त में जब बाढ़ग्रस्त गांवों में सामान्य आवाजाही तक मुश्किल हो गई थी, मकेर की स्वास्थ्य टीम लोगों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। 30 सितंबर से आई भीषण बाढ़ ने मकेर प्रखंड के कई इलाकों में जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया और बड़ी संख्या में लोग घरों में ही फंस गए। सबसे बड़ी चिंता उन गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को लेकर थी, जिन्हें आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी। इस चुनौती के बीच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) मकेर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. गोपाल कृष्ण की टीम ने प्रखंड मूल्यांकन एवं अनुश्रवण सहायक-सह-प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक अमित कुमार सिंह के नेतृत्व में राहत और स्वास्थ्य सेवाओं का मोर्चा संभाला।
जलमग्न घर से गर्भवती महिला को निकाला, कराया सुरक्षित प्रसव
बाढ़ के बीच सबसे चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियानों में से एक बिक्रम कैतुका गांव में हुआ। गांव की जागृति कुमारी, पति धुरंधर बैठा, बाढ़ के पानी के बीच अपने घर में फंस गई थीं। उनकी स्थिति को देखते हुए तत्काल मदद की जरूरत थी। घर तक पहुंचने के रास्ते पूरी तरह जलमग्न थे। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम सक्रिय हुई। प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक अमित कुमार सिंह ने एनडीआरएफ टीम के साथ समन्वय किया और खुद रेस्क्यू अभियान में शामिल हुए। एनडीआरएफ की मदद से जागृति कुमारी को जलमग्न घर से सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई गई और सुरक्षित प्रसव कराया गया। इस पूरे अभियान में समय पर सूचना, त्वरित समन्वय और स्वास्थ्य टीम की तत्परता ने जच्चा-बच्चा दोनों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई।
फुलवरिया में भी बाढ़ के बीच पहुंची मदद
बाढ़ से घिरे फुलवरिया गांव में भी स्वास्थ्य विभाग के सामने ऐसी ही चुनौती थी। गांव की प्रीति कुमारी, पति तूफान राय, को प्रसव के लिए सुरक्षित स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना आसान नहीं था। चारों तरफ पानी और बाधित रास्तों के बावजूद स्वास्थ्य टीम ने उपलब्ध संसाधनों के सहारे उन्हें सुरक्षित तरीके से सीएचसी गरखा पहुंचाया, जहां उनका सफल प्रसव कराया गया। इसी गांव की तजमुन खातून, पति मो. मुस्लिम अली, भी बाढ़ के कारण सामान्य आवागमन से कट गई थीं। स्वास्थ्य टीम ने उनके परिवार से लगातार संपर्क बनाए रखा और प्रसव की स्थिति पर नजर रखी। जरूरी प्रबंध के बाद 1 अक्टूबर 2026 को उनका भी सुरक्षित प्रसव कराया गया।
बाढ़ के दौरान इन मामलों में स्वास्थ्य विभाग के सामने केवल अस्पताल तक मरीज पहुंचाने की चुनौती नहीं थी, बल्कि जलमग्न इलाकों में सुरक्षित तरीके से पहुंचना, परिवहन की व्यवस्था करना और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना भी बड़ी चुनौती थी।
पांच फीट पानी से घिरे घर में फंसी वृद्ध महिला का रेस्क्यू
गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के साथ मकेर की स्वास्थ्य टीम ने एक अकेली वृद्ध महिला के लिए भी रेस्क्यू अभियान चलाया। महिला का घर चारों ओर से करीब पांच फीट से अधिक पानी से घिर गया था। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था और घर में अकेली होने के कारण उनकी स्थिति और भी चिंताजनक थी। जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य टीम ने प्रशासनिक स्तर पर समन्वय किया। अमित कुमार सिंह ने NDRF/SDRF टीम के सहयोग से तत्काल रेस्क्यू अभियान शुरू कराया। काफी मशक्कत के बाद वृद्ध महिला को जलमग्न घर से सुरक्षित बाहर निकाला गया और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। यह अभियान इस बात का उदाहरण रहा कि आपदा के समय स्वास्थ्य विभाग की भूमिका सिर्फ अस्पताल और दवा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्यकर्मी जीवन बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान का हिस्सा भी बनते हैं।
अपने घर डूबे तो भी ड्यूटी नहीं छोड़ी स्वास्थ्यकर्मियों ने
बाढ़ की मार सिर्फ आम लोगों तक सीमित नहीं रही। मकेर प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग के कई एएनएम, सीएचओ और आशा कार्यकर्ताओं के घरों में भी पानी घुस गया। कई कर्मी खुद बाढ़ की परेशानी झेल रहे थे, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं बाधित न हों, इसके लिए उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ठहराने की व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयुष्मान आरोग्य मंदिर, फुलवरिया सहित अन्य सुरक्षित स्थानों पर स्वास्थ्यकर्मियों के रहने की व्यवस्था की गई। उनके लिए भोजन और पेयजल की भी व्यवस्था की गई, ताकि वे राहत एवं स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार योगदान दे सकें।
जलमग्न इलाकों में मेडिकल कैंप
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारी और संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया था। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सबसे अधिक जलमग्न इलाकों को चिह्नित कर वहां मेडिकल कैंप लगाए। कई स्थानों तक पहुंचने के लिए नाव और उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का सहारा लिया गया। इन कैंपों में लोगों को प्राथमिक उपचार और जरूरी जीवनरक्षक दवाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई गईं। बाढ़ के पानी के बीच स्वास्थ्य टीमों की आवाजाही आसान नहीं थी, फिर भी कर्मियों ने प्रभावित इलाकों तक पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की जानकारी ली और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया।
आपदा में स्वास्थ्य विभाग बना भरोसे का सहारा
मकेर में बाढ़ के दौरान स्वास्थ्य विभाग की यह सक्रियता सिर्फ कुछ मरीजों तक सहायता पहुंचाने तक सीमित नहीं रही। गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव तक पहुंचाना, बुजुर्गों को जलमग्न घरों से निकालना, स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराना और बाढ़ग्रस्त इलाकों में मेडिकल कैंप लगाना इन तमाम प्रयासों ने आपदा के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था को सक्रिय बनाए रखा।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. गोपाल कृष्ण ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में स्वास्थ्य विभाग का सबसे बड़ा लक्ष्य हर जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना था। खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि पूरी टीम ने अपनी परेशानियों की परवाह किए बिना दिन-रात काम किया। बाढ़ का पानी भले ही मकेर के कई गांवों में रास्तों को रोक रहा था, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों की कोशिशों ने लोगों तक पहुंचने का रास्ता बनाए रखा। संकट की घड़ी में पीएचसी मकेर की टीम का यह समर्पण इस बात की मिसाल बना कि आपदा के समय स्वास्थ्य सेवा सिर्फ इलाज नहीं, बल्कि जीवन बचाने की जिम्मेदारी भी होती है।
Saharsa, Bihar | Oct 7, 2026