लिटिल हार्टस में शिक्षकों के लिए वैदिक गणित कार्यशाला का आयोजन - शिक्षकों ने जाना भारत की गौरवशाली गणितीय विरासत का महत्व
स्थानीय लिटिल हार्टस पब्लिक स्कूल, भिवानी में आज शिक्षकों के लिए एक विशेष वैदिक गणित कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध वैदिक गणित विशेषज्ञ श्री विमलेश आर्य ने भारतीय गणितीय परंपरा एवं वैदिक गणित की विभिन्न तकनीकों पर विस्तार से प्रकाश डाला। विद्यालय के महासचिव संजय गोयल, एम.डी. पवन गोयल व भावना गोयल जी ने बताया कि इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व प्राचार्य हलवासिया विद्या विहार, श्री विमलेश आर्य जी उपस्थित हुए जो गणित अध्यापन में 44़ वर्षों का अनुभव रखने वाले एक अनुभवी शिक्षाविद हैं। इस सत्र का उद्देश्य शिक्षको द्वारा छात्रों को तीव्र मानसिक गणना की प्राचीन भारतीय प्रणाली से परिचित कराना और उनमें पाठ्यपुस्तकों से परे संख्याओं में रुचि विकसित करना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री विमलेश आर्य ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही गणित और ज्ञान-विज्ञान का अग्रदूत रहा है। महर्षि भारद्वाज, महर्षि कात्यायन, महर्षि पाणिनि, आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कराचार्य जैसे महान विद्वानों ने गणित को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने बताया कि शून्य (0), दशमलव पद्धति तथा अनेक गणितीय सिद्धांत भारत की ऐसी अमूल्य देन हैं, जिनके बिना आधुनिक विज्ञान और तकनीक की कल्पना भी संभव नहीं है। श्री आर्य ने कहा कि वैदिक गणित भारतीय ज्ञान परंपरा का एक महत्वपूर्ण अंग है, जो गणनाओं को सरल, त्वरित और त्रुटिरहित बनाने में सहायता करता है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार जोड़, घटाव, गुणा, भाग, वर्ग तथा अन्य गणितीय गणनाएँ पारंपरिक विधियों की तुलना में कम समय में की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा में गणित को केवल विषय के रूप में नहीं, बल्कि तार्किक चिंतन और बौद्धिक विकास के साधन के रूप में देखा जाता था। आज आवश्यकता है कि हम अपनी समृद्ध गणितीय विरासत को पुनः समझें और नई पीढ़ी तक पहुँचाएँ। विद्यालय की निदेशिका ऐश्वर्या सिंघल, निदेशक रामानंद सिंघल, राहुल गोयल, विनय गोयल, निश्चल गोयल, साक्षी गोयल, प्राचार्य दीपक जोशी व उप-प्राचार्य मनमोहन चावला ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाने पर बल देती है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को भारतीय ज्ञान-विज्ञान की जड़ों से जोड़ते हैं तथा शिक्षण को अधिक प्रभावी एवं रोचक बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं। कार्यशाला के दौरान शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा वैदिक गणित के विभिन्न सूत्रों और उनके व्यावहारिक उपयोगों को समझा। अंत में विद्यालय प्रशासन द्वारा श्री विमलेश आर्य का आभार व्यक्त किया गया।
“भारत ने विश्व को केवल अंक नहीं दिए, बल्कि गणित को सोचने और समझने का एक नया दृष्टिकोण भी दिया। वैदिक गणित हमारी उसी गौरवशाली गणितीय परंपरा का जीवंत प्रतीक है।”- विमलेश आर्य।