हिल्लू और टुवान की महिलाओं ने संभाला मोर्चा, एक महीने से क्षतिग्रस्त पुल के निर्माण में जुटे ग्रामीण
पांगी। हिल्लू और टुवान गांव के लोगों ने प्रशासन और सरकार की कथित उदासीनता से परेशान होकर आखिरकार क्षतिग्रस्त पुल के निर्माण की जिम्मेदारी खुद अपने हाथों में ले ली है। पिछले करीब 25 से 30 दिनों से पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बार-बार सरकार और प्रशासन से संपर्क करने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों ने स्वयं पुल के निर्माण का बीड़ा उठाया।
शुक्रवार से ग्रामीणों ने पुल के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया। इस कार्य में गांव के पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं और बच्चे भी हाथ बंटाते नजर आए। महिलाओं द्वारा खुद रास्ता और पुल बनाने के लिए श्रमदान करने का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसी स्थिति आएगी, जब सरकार और प्रशासन से लगातार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें अपने आवागमन के लिए खुद ही रास्ता तैयार करना पड़ेगा। ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने पिछले करीब एक महीने से संबंधित विभाग और प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
ग्रामीण सत्या प्रकाश ने कहा कि करीब 25 से 30 दिनों से सरकार और प्रशासन से लगातार बातचीत की जा रही थी, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो लोगों को मजबूर होकर स्वयं मोर्चा संभालना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि लोक निर्माण विभाग के कुछ कर्मचारी और मजदूर मिलकर इस छोटे से कार्य को पूरा कर सकते थे, तो आखिर ग्रामीणों को इतनी परेशानी क्यों उठानी पड़ी।
उन्होंने कहा कि वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिलाएं तक मजबूरी में रास्ता बनाने के लिए श्रमदान कर रही हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या हिल्लू और टुवान के लोग प्रशासन की नजर में इतने उपेक्षित हैं कि उनकी समस्या के समाधान के लिए उन्हें खुद ही निर्माण कार्य करना पड़े।
अस्थायी मार्ग निर्माण को लेकर भी विवाद
वहीं, पांगी प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की ओर से कई बार ग्रामीणों से सहयोग की अपील की गई है। प्रशासन और विभाग के अनुसार, इस क्षेत्र में अस्थायी मार्ग बनाने में सबसे बड़ी अड़चन हिल्लू गांव के लोगों द्वारा सड़क की कटाई की अनुमति नहीं देना है। विभाग का कहना है कि यदि सड़क की कटाई की अनुमति मिल जाती है तो अस्थायी मार्ग तैयार कर लोगों की आवाजाही सुचारू की जा सकती है।
दूसरी ओर, हिल्लू गांव के लोगों का तर्क है कि यदि विभाग द्वारा उस स्थान पर अस्थायी सड़क बनाई जाती है तो गांव के लिए खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात या बाढ़ की स्थिति में सड़क कटाई के कारण पानी का रुख गांव की ओर हो सकता है और इससे हिल्लू गांव को सीधा खतरा पैदा होने की आशंका है।
प्रशासन और ग्रामीणों के बीच समाधान की जरूरत
पूरे मामले में एक तरफ ग्रामीण अपनी परेशानी का हवाला देते हुए तत्काल पुल और रास्ते की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग सुरक्षा और सड़क निर्माण की व्यवहारिक अड़चनों का हवाला दे रहा है। ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और ग्रामीणों के बीच मौके पर बैठक कर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही भी बहाल हो और हिल्लू गांव की सुरक्षा से भी कोई समझौता न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विभाग का विरोध करना नहीं, बल्कि अपनी मूलभूत जरूरत के लिए सुरक्षित रास्ता हासिल करना है। अब देखना होगा कि ग्रामीणों के स्वयं निर्माण कार्य शुरू करने के बाद प्रशासन और लोक निर्माण विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
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Saach, Chamba | Aug 21, 2026