गिरि नदी का तटीयकरण नहीं हुआ तो बांगरण कभी खतरे से बाहर नहीं होगा:ज्ञान सिंह चौहान
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बांगरण गांव में लगातार दूसरे साल आपदा की मार के बाद ग्रामीणों का गुस्सा अब सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ खुलकर सामने आने लगा है। श्री पांवटा साहिब विकास मंच के अध्यक्ष ज्ञान सिंह चौहान का कहना है कि पिछली बार भी चेताया गया था कि जब तक गिरि नदी का तटीयकरण नहीं होता, बांगरण खतरे से बाहर नहीं आएगा। इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में गंभीरता से काम नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि गिरि नदी का तटीयकरण करवाना सरकार की जिम्मेवारी है और इसमें स्थानीय विधायक के साथ-साथ शिमला सांसद सुरेश कश्यप की भी बराबर जिम्मेवारी बनती है। लगातार दूसरे वर्ष आपदा आने के बावजूद सांसद का प्रभावित गांव में पहुंचकर लोगों का दुख-दर्द जानने और मदद के लिए आगे न आना बेहद चिंताजनक है।
संस्था अध्यक्ष एवं ग्रामीणों ने DMF फंड को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि पानी की योजना के लिए प्रस्तावित करीब 40 लाख रुपये भी धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहे। ग्रामीणों ने मांग उठाई कि बांगरण जैसे आपदा प्रभावित क्षेत्र के लिए हिमाचल सरकार कम से कम 4 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार भी 4 करोड़ रुपये मंजूर करे, ताकि स्थायी सुरक्षा व्यवस्था तैयार हो सके।
उन्होंने डीएमएफ बजट के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि पांवटा के लिए उपलब्ध करीब 9 करोड़ रुपये में से 6 करोड़ रुपये अन्य जगहों पर खर्च किए गए, जबकि बचे हुए बजट में से करीब 72 लाख रुपये की लागत से 40 हैंडपंप लगाने की योजना बनाई जा रही है।
चौहान ने कहा है कि “हैंडपंप की राजनीति बहुत हो चुकी, अब बांगरण के गरीब और आपदा प्रभावित परिवारों की चिंता करनी होगी।”
साढ़े तीन करोड़ का एस्टीमेट भी ठंडे बस्ते में?
ग्रामीणों के अनुसार बांगरण की सुरक्षा और जरूरी कार्यों के लिए करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का एस्टीमेट भेजा गया था। अब सवाल यह है कि उस एस्टीमेट पर कार्रवाई कब होगी और प्रभावित परिवारों को स्थायी राहत कब मिलेगी?
ग्रामीणों ने कहा कि नेताओं को पिछले एक साल से ही इस समस्या पर गंभीरता दिखानी चाहिए थी। अब जब लगातार दूसरे साल गांव में आपदा ने दस्तक दी है तो केवल दौरे, आश्वासन और बयानबाजी से काम नहीं चलेगा।
ग्रामीणों का साफ कहना है—बांगरण को राहत नहीं, अब स्थायी सुरक्षा चाहिए। गिरि नदी का तटीयकरण कर गांव को सुरक्षित किया जाए और आपदा प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं।
: इस अवसर पर नरेंद्र कुमार, मोती राम, हेमराज, ओमप्रकाश, नरेंद्र पाल, कृष्णा, सरोपो, रवि, महेंद्र, सुमेर आदि उपस्थित रहे।