गया सेंट्रल जेल में बड़ा एक्शन: कैदियों से मिलीभगत के आरोप में उपाधीक्षक सस्पेंड, जेल प्रशासन में मचा हड़कंप
गया। बिहार के गया केंद्रीय कारा से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। बंदियों से कथित मिलीभगत, जेल नियमों की अनदेखी और प्रतिबंधित सामग्री को बिना जांच जेल के अंदर पहुंचाने के गंभीर आरोपों के बीच केंद्रीय कारा के उपाधीक्षक सुदर्शन प्रसाद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, जेल उपाधीक्षक सुदर्शन प्रसाद सिंह पर आरोप है कि वे बंदियों के परिजनों से पैसे लेकर उनके द्वारा लाए गए सामान को बिना निर्धारित सुरक्षा जांच के जेल परिसर के अंदर भिजवाते थे। इतना ही नहीं, यदि कोई जेलकर्मी या पुलिसकर्मी इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताता था तो उसे फटकार लगाई जाती थी। इससे जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब एक बंदी का परिजन प्रतिबंधित सामग्री लेकर जेल के अंदर प्रवेश करने का प्रयास करते हुए पकड़ा गया। इस घटना के बाद जेल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। जेल अधीक्षक ने पूरे मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने का निर्देश दिया, लेकिन उपाधीक्षक ने एफआईआर दर्ज कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद जेल अधीक्षक ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेज दी।
रिपोर्ट मिलने के बाद जेल महानिरीक्षक ने मामले की प्रारंभिक जांच कराई। जांच में प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए जेल उपाधीक्षक सुदर्शन प्रसाद सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा, मुजफ्फरपुर निर्धारित किया गया है।
इस कार्रवाई के बाद गया केंद्रीय कारा के अधिकारियों और कर्मचारियों में हलचल तेज हो गई है। जेल प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि प्रतिबंधित सामग्री पहले भी जेल के अंदर पहुंचाई गई थी या नहीं और इस पूरे नेटवर्क में अन्य लोगों की भूमिका क्या रही है। यदि जांच में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
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