वीआरजी कॉलेज की छात्राओं ने बंजर जमीन को हरा-भरा करने के लिये बनाईं सीड बॉल
फूल-पत्तियों से रचीं इकोफ्रेंडली राखियां
भाई-बहन के स्नेह के पर्व रक्षाबंधन को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए शासकीय विजया राजे स्नातकोत्तर कन्या महाविद्यालय, मुरार की छात्राओं ने अनूठी पर्यावरणीय पहल की है। महाविद्यालय के इको क्लब के अंतर्गत छात्राओं ने मिट्टी, गोबर और खाद से सीड बॉल (बीज गेंद) तैयार कर खाली एवं बंजर भूमि को हरियाली में बदलने का संकल्प लिया, वहीं मोगरा, सदाबहार, अपराजिता, चंपा और हरसिंगार जैसे पौधों की पत्तियों तथा ड्राई फ्रूट्स से इकोफ्रेंडली राखियां बनाकर भाई-बहन के प्रेम के साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एस.के. श्रीवास्तव के सान्निध्य में आयोजित इस रचनात्मक कार्यक्रम में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इको क्लब की संयोजक डॉ. अंजू शर्मा ने छात्राओं को सीड बॉल बनाने की विधि सिखाते हुए इसके पर्यावरणीय महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीड बॉल पर्यावरण को हरा-भरा बनाने तथा खाली और बंजर भूमि पर पौधे उगाने का सरल, प्राकृतिक और प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने बताया कि सीड बॉल को दूर-दराज के जंगलों, पहाड़ियों और ऐसे बंजर क्षेत्रों में भी आसानी से पहुंचाया या फेंका जा सकता है, जहां मनुष्यों का पहुंचना कठिन होता है। बीजों को मिट्टी, गोबर और खाद के मिश्रण से बने गोलाकार आवरण में सुरक्षित रखा जाता है। यह प्राकृतिक आवरण बीजों को पक्षियों और कीटों से बचाने में सहायक होता है। बारिश के मौसम में पर्याप्त नमी मिलने पर सीड बॉल के भीतर मौजूद बीज स्वतः अंकुरित होकर पौधे का रूप लेने लगते हैं। इस प्रकार कम संसाधनों में भी प्रकृति के पुनर्जीवन की दिशा में प्रभावी कदम उठाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने रक्षाबंधन के अवसर पर प्रकृति के अनुकूल राखियां भी तैयार कीं। उन्होंने मोगरा, सदाबहार, अपराजिता, चंपा और हरसिंगार आदि फूलों की पत्तियों तथा ड्राई फ्रूट्स का रचनात्मक उपयोग करते हुए आकर्षक एवं पर्यावरण हितैषी राखियां बनाईं। इन राखियों के माध्यम से छात्राओं ने प्लास्टिक एवं कृत्रिम सामग्री के विकल्प के रूप में प्राकृतिक वस्तुओं के उपयोग का संदेश दिया।
प्राचार्य डॉ. एस.के. श्रीवास्तव ने छात्राओं की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि इकोफ्रेंडली राखियां केवल भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से प्रकृति के प्रति प्रेम, संरक्षण और जिम्मेदारी का संदेश भी दिया जा रहा है। उन्होंने छात्राओं को इस तरह की रचनात्मक और पर्यावरण हितैषी गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम का आयोजन बॉटनी विभाग में किया गया। इस अवसर पर इको क्लब के सदस्य डॉ. प्रीति गुप्ता, डॉ. अर्चना शर्मा, डॉ. प्रदीप शर्मा, डॉ. शिखा जैन, आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर डॉ. रेनू एस. नायर तथा बॉटनी विभाग की डॉ. पूर्ति पांडे, डॉ. सारिका सक्सेना एवं श्रीमती सुरभि दानवे उपस्थित रहीं।
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