जर्जर 108 एंबुलेंस व्यवस्था पर उठे सवाल, जरूरतमंदों को समय पर नहीं मिल रही सेवा
सिंगरौली। जिले में संचालित 108 एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। सरकार द्वारा आमजन को आपातकालीन स्थिति में तत्काल स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित 108 सेवा जिले में अव्यवस्थाओं का शिकार होती नजर आ रही है। कई एंबुलेंस जर्जर हालत में खड़ी हैं, जबकि उचित रखरखाव के अभाव में जरूरतमंद मरीजों को समय पर वाहन उपलब्ध नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
वाहन चालकों के अनुसार 108 सेवा ठेका प्रथा के तहत संचालित होने के कारण उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चालकों ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों के दबाव में वाहनों को निर्धारित समय और क्षमता से अधिक चलवाया जाता है। निर्देशों का पालन नहीं करने पर नौकरी से हटाने तक की स्थिति बन जाती है। कुछ चालकों ने पीएफ की राशि समय पर नहीं मिलने की बात भी कही है।
चालकों का आरोप है कि कई बार वाहनों की दूरी और कॉल को लेकर भी दबाव बनाया जाता है। वहीं, एंबुलेंस के नियमित मेंटेनेंस की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। सीधी, देवसर और वैढ़न सहित जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में कई 108 एंबुलेंस गैरेज में खड़ी देखी जा सकती हैं। कुछ वाहन मुख्य सड़क और एसपी कार्यालय के सामने तक खड़े दिखाई देने की बात सामने आई है।
बताया जाता है कि मेंटेनेंस के लिए गैरेज भेजे गए वाहनों का भुगतान समय पर नहीं होने से भी वाहन समय पर तैयार नहीं हो पाते। इसका सीधा असर मरीजों और उनके परिजनों को भुगतना पड़ता है। कई बार गंभीर मरीजों को एंबुलेंस के बजाय निजी साधनों, रिक्शे, साइकिल अथवा चारपाई के सहारे अस्पताल तक पहुंचाने की मजबूरी सामने आती रही है।
कागजों में भले ही जिले में 108 वाहनों की संख्या पर्याप्त बताई जाती हो, लेकिन जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय रहते प्रशासन और संबंधित स्वास्थ्य विभाग द्वारा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा वाहनों के फिटनेस, मेंटेनेंस, कॉल रिस्पांस, चालकों की समस्याओं और ठेका व्यवस्था की समीक्षा की जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
आम जनता का सवाल है कि जिस आपातकालीन सेवा का उद्देश्य संकट की घड़ी में मरीजों को तत्काल अस्पताल पहुंचाना है, यदि वही व्यवस्था जर्जर वाहनों और अव्यवस्थाओं से जूझती रहेगी तो गंभीर परिस्थितियों में मरीजों की जान पर खतरा और बढ़ सकता है। प्रशासन को मामले में ठोस कदम उठाकर 108 सेवा को प्रभावी एवं भरोसेमंद बनाने की जरूरत है।