*सद्गुरु की कृपा के बिना मोह ओर अज्ञान मुक्त नहीं हो सकता जीवन-आचार्य रामदयालजी महाराज*
*सुनना व सहना जिसके जीवन में है वह ही कुंदन बनेगा*
*माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग*
भीलवाड़ा:निलेश काठेड़ (वरिष्ठ पत्रकार ),3 अगस्त जिनकी रचना भगवान ने की है उसे नरक में जाना पड़ सकता है पर जिसकी रचना सद्गुरू ने की है नरक उसका बाल भी बांका नहीं कर सकता है वह नारायण का धाम बन जाता है।
सद्गुरू की कृपा होने से ही ज्ञानी, साधक हर परिस्थिति में गंभीर रहते है। जीवन मोह ओर अज्ञान से मुक्त होना चाहिए पर सदगुरु की कृपा के बिना ऐसा जीवन नहीं हो सकता।
ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने सोमवार को ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सुनना व सहना जिसके जीवन में है वह ही कुंदन बनेगा। ये दोनों हमारे कमजोर हो गए है इसीलिए परिवार,समाज व राष्ट्र टूटता बिखरता नजर आ रहा है। हमे सुनाना तो पसंद है पर सुनना पसंद नहीं करते है। जीवन में छोटी सी मुसीबत आने पर घबरा जाते है। शिष्य के जीवन को संवारने ओर मुसीबत सहने के लिए तैयार करने का कार्य सद्गुरू करते है। आचार्यश्री ने कहा कि जीवन में कितनी परीक्षाएं होती है पर हमारा सहना बहुत कमजोर होने से थोड़े से शब्दों से ही घायल हो जाते है। गुरू को शंकर इसलिए कहा जाता है क्योंकि वहीं विष पीने की ताकत ओर संकट को हरने की क्षमता रखते है। उन्होंने कहा कि शास्त्र कहते जहां नारी की पूजा होती है वहां देवताओं का वास होता है पर नारी ताड़का, सूर्पणखा, केकयी जैसी नहीं होनी चाहिए जिनका नाम भी कोई अपने घर में नहीं रखना चाहता है। नाम उसी पर रखे जाते है जो पूजनीय होती है।
सत्संग में आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि हमारा जीवन पानी के समान है जैसे पात्र भले बदल जाए पर प्यास पानी से बुझाई जा सकती उसी तरह दुनिया के सारे शास्त्र तुम्हारे सामने हो पर गुरू की कृपा के बिना तत्व की प्राप्ति ओर गोविन्द का साक्षात्कार नहीं हो सकता है।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है। सायं काल संध्या आरती ,रामधुनी उपरांत रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत रामजस ईडर वाले भक्तमाल पर कथा, प्रवचन कर भक्तजनों को धर्म संदेश दे रहे हैं।
*रामद्वाराधाम में रक्तदान शिविर में 57 यूनिट रक्त एकत्रित*
रामद्वारा धाम परिसर में रविवार को आचार्य श्रीरामदयालजी महाराज के सानिध्य में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। सुबह 10 से शाम 5 बजे तक चले शिविर में कुल 57 यूनिट रक्त संग्रहित हुआ। रक्त संग्रहण का कार्य रामस्नेही चिकित्सालय ब्लड बैंक की टीम ने किया। आचार्यश्री ने शिविर में रक्तदान करने वालों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि रक्त देकर हम किसी प्राणी का जीवन बचाने में सहायक बन सकते है। रक्तदान महादान होकर मानव सेवा का अनमोल कार्य है। मुस्कराते हुए मन में राम राम स्मरण करते हुए रक्तदान करना चाहिए। उन्होंने रक्तदाताओं को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।