लखनऊ: 'समान काम-समान वेतन' को लेकर इको गार्डन में बॉन्डेड डॉक्टरों का धरना, कार्य बहिष्कार की चेतावनी
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से निकले युवा डॉक्टरों ने वेतन विसंगतियों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) पर 2 साल का अनिवार्य सर्विस बॉन्ड पूरा कर रहे MBBS डॉक्टरों ने इको गार्डन में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
2018, 2019 और 2020 बैच के इन बॉन्डेड मेडिकल ऑफिसर्स का आरोप है कि एक ही डिग्री और एक जैसे बॉन्ड के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा दे रहे डॉक्टरों के साथ आर्थिक भेदभाव किया जा रहा है।
क्या है डॉक्टरों का मुख्य दर्द?
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के अनुसार, मेडिकल कॉलेजों में तैनात बॉन्डेड डॉक्टरों को लेवल-10 पे-मैट्रिक्स (₹5,400 ग्रेड पे) के साथ महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) दिया जा रहा है। इसके विपरीत, CHC और PHC में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों को महज ₹50,000 से ₹65,000 प्रतिमाह का तय मानदेय दिया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यह 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के मूल सिद्धांत का सीधा उल्लंघन है।
आश्वासन के बाद भी नहीं आया शासनादेश (G.O.)
डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में उल्लेख किया है कि सितंबर माह में उपमुख्यमंत्री द्वारा 3 सितंबर तक शासनादेश (G.O.) जारी करने का भरोसा दिया गया था। हालांकि, तय समय बीत जाने के बाद भी केवल सैद्धांतिक प्रस्ताव पत्र ही सामने आया, कोई ठोस सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ।
मुख्य माँगें:
वेतन समानता (Pay Parity): CHC/PHC में तैनात सभी बॉन्डेड डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेजों के समकक्ष लेवल-10 (₹5,400 ग्रेड पे) और अन्य सभी देय भत्ते (DA, HRA, NPA, TA) दिए जाएं।
समयबद्ध शासनादेश: वेतन संशोधन को लेकर लंबित सरकारी आदेश (G.O.) बिना किसी देरी के तत्काल जारी किया जाए।
डॉक्टरों ने दो-टूक कहा है कि जब तक सरकार इस विसंगति को दूर करते हुए आधिकारिक आदेश जारी नहीं करती, तब तक उनका लोकतांत्रिक आंदोलन और संपूर्ण कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टरों ने भूख हड़ताल पर जाने की भी चेतावनी दी है।
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Bilgram, Hardoi | Oct 18, 2026