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कहानी बदलाव की
सीमित संसाधनों से आधुनिक डेयरी फार्म तक का सफर, पशुपालन से आत्मनिर्भर बने भूपेंद्र नायक
मात्र 5-6 दुधारू पशुओं से शुरू हुआ सफर, आज 56 उन्नत नस्ल के पशुओं से प्रतिदिन 400 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन
पशुपालन विभाग की समुन्नत मुर्रा पाड़ा योजना से मिला लाभ, उन्नत नस्ल के पशुधन विकास को मिल रहा बढ़ावा
मेहनत, लगन और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर सीमित संसाधनों से भी आत्मनिर्भरता की राह प्रशस्त की जा सकती है। इसका उदाहरण प्रस्तुत किया है झाबुआ जिले के थांदला विकासखंड अंतर्गत ग्राम सूतरेटी के प्रगतिशील पशुपालक श्री भूपेंद्र नायक ने। उन्होंने अपने पिता द्वारा शुरू किए गए छोटे से पशुपालन व्यवसाय को आज आधुनिक डेयरी फार्म के रूप में विकसित कर सफलता की नई मिसाल कायम की है।
लगभग 15 वर्ष पूर्व उनके पिता श्री अभय सिंह नायक ने मात्र 5-6 दुधारू पशुओं के साथ पशुपालन कार्य प्रारंभ किया था। उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्हें परिवार के भरण-पोषण के लिए मजदूरी एवं अन्य लोगों की दुकानों पर कार्य करना पड़ता था। आर्थिक कठिनाइयों के चलते श्री भूपेंद्र नायक को भी 12वीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
परिस्थितियों से हार मानने के बजाय श्री भूपेंद्र नायक ने अपने पिता के पशुपालन व्यवसाय को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। पिछले 8-10 वर्षों से वे स्वयं डेयरी फार्म का संपूर्ण प्रबंधन संभाल रहे हैं। निरंतर मेहनत, बेहतर पशुधन प्रबंधन एवं आधुनिक पशुपालन तकनीकों को अपनाने के परिणामस्वरूप आज उनके डेयरी फार्म में 56 उन्नत नस्ल की गायें एवं भैंसें हैं, जिनसे प्रतिदिन 400 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन हो रहा है।
उनके डेयरी फार्म में जाफराबादी एवं मुर्रा नस्ल की भैंसों के साथ गिर, एच.एफ. (होल्स्टीन फ्रीजियन) एवं जर्सी नस्ल की गायें हैं। इसके अतिरिक्त वे उन्नत नस्ल के प्रजनन सांडों का भी पालन कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण पशुधन विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
पशुपालन विभाग की योजना बनी पशुधन विकास में सहायक
श्री भूपेंद्र नायक को वर्ष 2018-19 में पशुपालन विभाग की समुन्नत मुर्रा पाड़ा योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त हुआ। योजना के तहत प्राप्त मुर्रा सांड से अब तक 400 से अधिक भैंसों का प्रजनन कराया जा चुका है। इसके अतिरिक्त उक्त सांड से उत्पन्न एक उत्कृष्ट पाड़े के माध्यम से भी 200 से अधिक पशुओं का प्रजनन कराया जा चुका है। इससे क्षेत्र में उन्नत नस्ल के पशुधन को बढ़ावा मिल रहा है।
श्री भूपेंद्र नायक की सफलता दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का लाभ, निरंतर परिश्रम एवं आधुनिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर पशुपालन को स्वरोजगार के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया जा सकता है। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ उनका यह सफर आज अन्य पशुपालकों एवं ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहा है।
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