देवभूमि के स्वाभिमान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, दोषियों पर हो जीरो टॉलरेंस की कार्रवाई : मोहित डिमरी!!
"आशीष नेगी के खिलाफ मुकदमा हो सकता है तो उत्तराखंड की महिलाओं को अपमानित करने वालों पर एफआईआर क्यों नहीं?"
रुद्रप्रयाग। पूर्व विधायक प्रत्याशी मोहित डिमरी ने उत्तराखंड में हाल के दिनों में हुई घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देवभूमि की शांति, सामाजिक सौहार्द और स्वाभिमान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नगरासू गुरुद्वारे में हथियारबंद निहंगों के उपद्रव तथा कर्णप्रयाग में एक युवक पर तलवार से हुए हमले जैसी घटनाओं ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है और इन मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
डिमरी ने आरोप लगाया कि उपद्रवियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें सुरक्षा देकर वापस भेजा गया, जिससे प्रदेशवासियों में रोष व्याप्त है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर पंजाब के कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा उत्तराखंड की मातृशक्ति और महिलाओं के खिलाफ अभद्र एवं आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थानीय युवक की प्रतिक्रिया से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उस पर खेद व्यक्त किया जा सकता है, लेकिन पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उन लोगों ने की जिन्होंने देवभूमि और उसकी महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का प्रयोग किया।
मोहित डिमरी ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के लोगों के मन में सिख गुरुओं, गुरुद्वारों और सिख समाज के प्रति हमेशा से गहरी श्रद्धा और सम्मान रहा है। पंजाब और उत्तराखंड के रिश्ते सदियों पुराने हैं। उनका विरोध किसी धर्म या समुदाय से नहीं, बल्कि कानून हाथ में लेने वाले और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले उपद्रवी एवं कट्टरपंथी तत्वों से है। उन्होंने सिख समाज के प्रबुद्ध लोगों से भी ऐसे तत्वों का समर्थन न करने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि एक बयान के आधार पर आशीष नेगी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है, तो उत्तराखंड और देवभूमि की महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करने वाले लोगों के विरुद्ध भी समान रूप से एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की जा रही। उन्होंने कहा कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान होना चाहिए और न्याय भी बिना किसी भेदभाव के होना चाहिए।
डिमरी ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले तथा महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए तथा प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अंत में उन्होंने कहा कि उत्तराखंड शांति, सद्भाव और भाईचारे की भूमि है, लेकिन यदि देवभूमि के स्वाभिमान और सम्मान पर कोई आंच आती है तो प्रदेशवासी कानून के दायरे में रहकर न्याय की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी, ताकि भविष्य में कोई भी उत्तराखंड की अस्मिता और महिलाओं के सम्मान पर टिप्पणी करने का साहस न कर सके।