हैप्पी सीडर तकनीक से बदली खेती की तस्वीर
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ग्रीष्मकालीन मूंग की सफल खेती कर कृषक किशोरी यादव बने क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा
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आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान न केवल अपनी उत्पादन लागत कम कर सकते हैं, बल्कि बेहतर उपज प्राप्त कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकते हैं। इसका उत्कृष्ट उदाहरण विकासखंड टीकमगढ़ के ग्राम नीमखेड़ा निवासी प्रगतिशील कृषक श्री किशोरी यादव ने प्रस्तुत किया है।
श्री किशोरी यादव ने कृषि अभियांत्रिकी विभाग एवं बी.आई.एस.ए. जबलपुर के मार्गदर्शन में गेहूं की कटाई के बाद ग्रीष्मकालीन मूंग की उन्नत किस्म विराट की बुवाई हैप्पी सीडर कृषि यंत्र के माध्यम से सीधे खड़ी नरवाई में बिना जुताई के की। उन्होंने 8 अप्रैल 2026 को मूंग की बुवाई की थी, जिसका अंकुरण अत्यंत संतोषजनक रहा। वर्तमान में उनकी फसल उत्कृष्ट स्थिति में है और उन्हें अच्छी उपज मिलने की पूरी संभावना है।
श्री किशोरी यादव बताते हैं कि हैप्पी सीडर तकनीक अपनाने से उन्हें खेत की तैयारी में लगने वाले समय, श्रम और लागत में उल्लेखनीय बचत हुई है। गेहूं की कटाई के बाद बिना जुताई सीधे बुवाई होने से प्रति एकड़ लगभग दो हजार रुपये तक की बचत हुई। साथ ही समय पर बुवाई होने से फसल का विकास बेहतर हुआ है, जिससे उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
इस तकनीक का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि खेत में बची गेहूं की नरवाई को जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मृदा की उर्वरता भी बनी रहती है। खेत में मौजूद नरवाई नमी संरक्षण का कार्य करती है तथा सिंचाई के बाद सड़कर जैविक खाद के रूप में मिट्टी को पोषण प्रदान करती है।
श्री यादव का कहना है कि यदि किसान आधुनिक कृषि यंत्रों एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएं तो कम लागत में अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने अन्य किसानों से भी हैप्पी सीडर जैसी नवाचार आधारित तकनीकों को अपनाने की अपील की है।
किसान हैप्पी सीडर यंत्र को अनुदान पर प्राप्त करने के लिए कृषि अभियांत्रिकी विभाग के पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। पात्र किसानों को यंत्र की लागत का लगभग 50 प्रतिशत अथवा लगभग 90 हजार रुपये तक का अनुदान प्रदान किया जाता है।
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